जयपुर। छोटी चौपड़ स्थित समाज श्री सीताराम जी मंदिर में सावन शुक्ल पक्ष की दशमी पर पारंपरिक झूला महोत्सव बड़े ही धूमधाम और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। मंदिर में सावन की तीज से प्रतिदिन भगवान सीताराम जी को चांदी के झूले में विराजमान करने की परंपरा है। इसी क्रम में दशमी पर मिथिला की सखियों के भाव के साथ जंवाई राजा श्रीराम जी को ससुराल में झूला झुलाकर उत्सव मनाया गया।
मंदिर के नंदकिशोर शर्मा ने ठाकुरजी को आकर्षक लहरिया पोशाक और सुंदर आभूषण धारण कराए। मोगरा, जूही और गुलाब के महकते फूलों की मालाओं से ठाकुरजी का विशेष श्रृंगार कर उन्हें चांदी के भव्य झूले में विराजमान किया गया।
संस्था के मंत्री रामबाबू झालानी ने बताया कि समाज की महिलाओं ने लहरिया परिधान पहनकर उत्सव में भाग लिया। महिलाओं ने ठाकुरजी को झूला झुलाते हुए सावन के पारंपरिक पद व भजन गाए। इस दौरान “सावण में आये ससुराल हो झूला झुलें पाहुना”, “प्यारी झुलन पधारों झुकि आई बदरा”, “झूले राजलली कुंजन में” और “हे रघुनंदन जनमन रंजन अलबेले सरकार हिंडोरे झुलोना” जैसे पदों की गूंज से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा।
कार्यक्रम के दौरान समाज के गणमान्य पुरुषों ने भी भजनों और पदों के माध्यम से ठाकुरजी की आराधना की। संस्था के अध्यक्ष नवल-किशोर झालानी ने संत-महंतों एवं भक्तों का माला-दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया। समारोह के समापन पर सभी उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रसादी का वितरण किया गया।



















