राधा लिखी राखी से सजा गोविंद देव जी का दरबार: मोतियों के बंगले में दिए मनोहारी दर्शन

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जयपुर। श्रावण शुक्ल पूर्णिमा पर शुक्रवार को रक्षाबंधन का पर्व जयपुर के मंदिरों में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। शहरवासियों ने प्रथम पूज्य भगवान गणेश और आराध्य देव गोविंददेवजी के मंदिर पहुंचकर रक्षा सूत्र और राखियां अर्पित कीं। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, शृंगार और भोग के आयोजन हुए। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिरों में पहुंचती रही।

गोविंददेवजी को अर्पित हुईं विशेष राखियां

शहर के आराध्य देव ठिकाना मंदिर श्री गोविंद देवजी महाराज में रक्षाबंधन पर ठाकुर श्रीजी और राधारानी को विशेष राखियां अर्पित की गईं। शृंगार झांकी में सबसे पहले फूल और मोतियों से तैयार राखी अर्पित की गई। इसके बाद रत्न जड़ित सुनहरी कलाबूत की राखी धारण कराई गई।

ठाकुरजी को रक्षाबंधन के अवसर पर विशेष सुनहरी पारचे की पोशाक पहनाई गई। मंदिर के संपूर्ण दरबार को भी आकर्षक राखियों से सजाया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने साथ राखियां और रक्षा सूत्र लेकर मंदिर पहुंचे। भक्तों ने भगवान को राखी अर्पित करने के लिए मंदिर परिसर में लगी रेलिंग पर ही रक्षा सूत्र बांधे।

पूर्व राजपरिवार की ओर से भी ठाकुरजी के लिए राखी और प्रसाद भेजकर रक्षाबंधन की परंपरा का निर्वहन किया गया।

दूर्वा-रेशम की राखी में प्रकृति संरक्षण का संदेश

गोविंददेवजी मंदिर में ठाकुरजी को दूर्वा, फूल और रेशम से तैयार विशेष राखियां भी अर्पित की गईं। इनमें ‘राधा’ लिखी राखी विशेष आकर्षण रही। मोगरे की कलियों से बनी राखी, रेशम की डोर में सुपारी के साथ तैयार कलाबूत की राखी और दूर्वा से बनी राखी क्रमवार ठाकुरजी को धारण कराई गई।

राधारानी सहित उनकी सखियों और महाप्रभुजी शालिग्रामजी के विग्रहों को भी राखियां अर्पित की गईं। दूर्वा और फूलों से तैयार राखियों के जरिए रक्षाबंधन को प्रकृति संरक्षण के संदेश से जोड़ा गया।

सायंकाल मोतियों के बंगले में सजे ठाकुरजी

सायंकाल की ग्वाल झांकी में ठाकुर श्रीजी के लिए दुर्लभ मोतियों का भव्य बंगला सजाया गया। ठाकुरजी को मोतियों से निर्मित पोशाक और मोती-अलंकारों से सजाया गया तथा मोती-जरी से सुसज्जित विशेष मुकुट धारण कराया गया। यह विशेष शृंगार श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र रहा।

रक्षाबंधन पर सुबह मंगला झांकी के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ठाकुरजी का पंचामृत अभिषेक किया गया। इसके बाद पूर्णिमा की विशेष सुनहरी लप्पा जामा पोशाक, बड़ा मुकुट, विशेष अलंकार और छड़ी धारण कराई गई। शृंगार आरती के बाद चौगुनी लड्डू, कचौरी और मीठी मठरी का विशेष भोग लगाया गया।

मोती डूंगरी गणेशजी को अर्पित की चांदी की राखी

रक्षाबंधन पर मोती डूंगरी गणेश मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही। भक्तों ने प्रथम पूज्य भगवान गणेश को अपना रक्षक और आराध्य मानते हुए रक्षा सूत्र अर्पित किए।

मंदिर के महंत कैलाश शर्मा ने भगवान गणेश के लिए विशेष चांदी की राखी तैयार कर अर्पित की। इसके साथ सुपारी का फूल भी भगवान को समर्पित किया गया। भगवान गणेश को लहरिया साफा और जरी-गोटे के काम से तैयार विशेष पोशाक धारण कराई गई।

मंदिरों में दिनभर रही भक्तों की भीड़

रक्षाबंधन के अवसर पर जयपुर के विभिन्न मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन हुए। भक्तों ने अपने आराध्य को राखियां और रक्षा सूत्र अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना की। मंदिरों में विशेष शृंगार, भोग और आरती के दौरान भक्ति का माहौल बना रहा।

गोविंददेवजी मंदिर में राखियों से सजा दरबार, ठाकुरजी का सुनहरी पोशाक में शृंगार और मोतियों का बंगला आकर्षण का केंद्र रहा, वहीं मोती डूंगरी गणेश मंदिर में चांदी की राखी और लहरिया पोशाक में सजे गणेशजी के दर्शन के लिए श्रद्धालु उमड़ते रहे।

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