उत्तराखण्ड की आराध्य देवी माँ नन्दा की यात्रा का जयपुर में भव्य स्वागत

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Grand welcome in Jaipur for the pilgrimage of Goddess Nanda, the revered deity of Uttarakhand.
Grand welcome in Jaipur for the pilgrimage of Goddess Nanda, the revered deity of Uttarakhand.

जयपुर। “जै-जै बोला जै भगोती नन्दा, नन्दा ऊँचा कैलासो की जै…” के गूंजते जयकारों, पारम्परिक लोकगीतों की मधुर धुनों और पहाड़ी परिधानों से सजे श्रद्धालुओं के उत्साह के बीच बुधवार को जयपुर पूरी तरह भक्तिमय हो उठा। मौका था उत्तराखण्ड की आराध्य देवी माँ नन्दा देवी की भारत भ्रमण प्रवास एवं प्रचार-प्रसार यात्रा के जयपुर आगमन पर गढ़वाल सभा जयपुर द्वारा आयोजित भव्य स्वागत समारोह का।

माँ नन्दा की डोली के जयपुर पहुँचने पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर अगवानी की। इस दौरान आयोजित कलश एवं शोभायात्रा में हजारों श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। जहां महिलाएं सिर पर कलश धारण कर लोकगीत गाते हुए चल रही थीं, वहीं युवा ढोल-दमाऊ की थाप पर झूमते नजर आए।

गढ़वाल सभा जयपुर के अध्यक्ष जी. पी. कुकरेती ने बताया कि महाराष्ट्र, गुजरात, जोधपुर और अजमेर से होते हुए यह यात्रा जयपुर पहुँची है। इस अवसर पर आयोजित पवित्र महायज्ञ में 101 जोड़ों ने विधिवत आहुतियाँ दीं। इसके उपरांत माँ नन्दा की महाआरती कर श्रद्धालुओं में प्रसादी का वितरण किया गया।

गढ़वाल सभा के महासचिव दलवीर सिंह नेगी ने बताया कि सम्पूर्ण उत्तराखण्ड में माँ नन्दा को बहन और बेटी के रूप में पूजा जाता है। हिमालय पुत्री माँ नन्दा का भगवान शिव के साथ विवाह के बाद कैलाश (ससुराल) जाने की परम्परा को नन्दा देवी लोकजात एवं बड़ीजात यात्रा के रूप में मनाया जाता है। जयपुर में जब माँ नन्दा को कैलाश के लिए विदा किया गया, तो लोकगीतों और जागरों के बीच उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं की आँखें नम हो गईं।

कार्यक्रम संयोजक सुखदेव ढोंडियाल ने कहा कि माँ नन्दा के प्रति अटूट आस्था ही इस यात्रा की सबसे बड़ी शक्ति है। जयपुर में भव्य पूजा-अर्चना और विदाई के बाद माँ नन्दा की डोली अपने अगले पड़ाव आगरा के लिए रवाना हो गई।

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