मेहरानगढ़ को यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क बनाने की दिशा में जन-जागरूकता अभियान

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जयपुर/जोधपुर। मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट की ओर से अंतरराष्ट्रीय भू-विविधता दिवस पर मेहरानगढ़ दुर्ग को भारत का पहला यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क बनाने की दिशा में जन-जागरूकता अभियान शुरू किया गया। महाराजा गज सिंह के मुख्य संरक्षण एवं मार्गदर्शन में आयोजित ‘मेहरानगढ़ जियो हेरिटेज वॉक’ में 300 से अधिक नागरिकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया।

जियो हेरिटेज वॉक आयोजन समिति के संयोजक डॉ. शिव सिंह राठौड़ ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य मेहरानगढ़ क्षेत्र की भू-विरासत, भू-विविधता, जल विरासत और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ जियो-टूरिज्म को प्रोत्साहित करना है। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 7 बजे मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के प्रशासनिक अधिकारी कर्नल अजय सिंह शेखावत के स्वागत उद्बोधन से हुई।

वॉक के दौरान यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क की दृष्टि से महत्वपूर्ण छह जियो साइट्स एवं हेरिटेज साइट्स की वैज्ञानिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जानकारी दी गई। डॉ. सुरेश माथुर ने वेल्डेड टफ और दुर्ग में लिफ्ट के समीप स्थित नॉन-कॉन्फॉर्मिटी की भूवैज्ञानिक संरचना और महत्व समझाया। वहीं महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश शोध केंद्र के सहायक निदेशक डॉ. महेंद्र सिंह तंवर ने चोकेलाव महल, झरना खान और चोकेलाव बाग सहित अन्य विरासत स्थलों की जानकारी दी।

डॉ. शिव सिंह राठौड़ ने रानीसर हाइड्रो जियो साइट के माध्यम से पारंपरिक जल संरचनाओं, जल संरक्षण और स्थानीय भूगर्भीय परिस्थितियों के संबंध को समझाया। प्रतिभागियों ने वॉक को मेहरानगढ़ की भू-विरासत को नए दृष्टिकोण से समझने वाला अनुभव बताया।

इस कार्यक्रम में कृषि एवं एमबीएम विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. (डॉ.) वीरेन्द्र सिंह जैतावत, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के पूर्व अधिकारी भंवरा राम, पूर्व अतिरिक्त मुख्य नगर नियोजक पीआर बेनीवाल सहित जियोसाइंस विशेषज्ञ, विद्यार्थी, शोधार्थी, पर्यटक गाइड और शहर के गणमान्य नागरिक शामिल हुए। महाराजा सरदार सिंह मेमोरियल छात्रावास एवं खेल केंद्र और रॉयल बालिका छात्रावास की वार्डन विजयलक्ष्मी के साथ छात्राओं ने भी भाग लिया।

चोकेलाव बाग में अल्पाहार के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। आयोजन समिति ने बताया कि मेहरानगढ़ की भू-विरासत और भू-विविधता को आमजन, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और पर्यटकों से जोड़ने के लिए ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आगे भी जारी रहेंगे।

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