जयपुर। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कांग्रेस पर लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक प्रक्रियाओं को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस लगातार इन संस्थाओं पर प्रहार कर देश में अराजकता फैलाना चाहती है। वर्षों की मेहनत, कानूनों और संसद की प्रक्रिया से मजबूत हुई संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना दुर्भाग्यपूर्ण है। भाजपा और एनडीए ने तय किया है कि कांग्रेस के इस रवैये को जनता के सामने उजागर किया जाएगा।
भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में वैष्णव ने एसआईआर, ईवीएम और मतदाता सूची को लेकर कांग्रेस के सवालों पर छह सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण आधार निष्पक्ष और शुद्ध मतदाता सूची है। इसी के आधार पर चुनाव होते हैं और नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) संविधान के तहत निर्धारित प्रक्रिया है, जो 1947 के बाद से कई बार अपनाई जा चुकी है। ऐसे में कांग्रेस अब इस पर सवाल क्यों उठा रही है?
उन्होंने कहा कि ईवीएम की शुरुआत कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुई थी। ईवीएम से पहले चुनावों में बूथ लूटने, मतपेटियां भरने और फर्जी मतदान जैसी घटनाएं सामने आती थीं। ईवीएम ने ऐसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद की। अब कांग्रेस किस आधार पर इस व्यवस्था पर सवाल उठा रही है? वैष्णव ने कहा कि कांग्रेस बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करती है। उसकी मांग पर एमएलसी चुनाव बैलेट पेपर से कराए गए, लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस सीटें नहीं जीत पाई। ऐसे में क्या कांग्रेस बैलेट पेपर से चुनाव कराने की अपनी मांग के परिणाम स्वीकार करेगी?
वैष्णव ने सवाल किया कि क्या कांग्रेस चाहती है कि गैर-नागरिकों के नाम भी मतदाता सूची में बने रहें? क्या मृत व्यक्तियों के नाम सूची से नहीं हटाए जाएं? क्या एक ही व्यक्ति के नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज रहें? उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जरूरी है। कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह ऐसी व्यवस्था का समर्थन करती है या नहीं।
उन्होंने संविधान को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा। वैष्णव ने कहा कि कांग्रेस नेता संविधान की किताब लेकर घूमते हैं, लेकिन उन्हें यह बताना चाहिए कि क्या वे संविधान की व्यवस्थाओं में वास्तव में विश्वास करते हैं? संसद का संचालन संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार होना चाहिए और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी है।
रेल मंत्री ने कहा कि सरकार समाज, देश और राजनीति से जुड़े सभी विषयों पर संसद में चर्चा कराने के लिए तैयार है। संसद देश की सबसे बड़ी पंचायत है। कांग्रेस एसआईआर पर चर्चा चाहती है तो सदन में आए और अपनी बात रखे। जरूरत पड़ने पर विशेष सत्र बुलाने से भी सरकार पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पहले भी विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की मांग करती रही है, लेकिन चर्चा के दौरान उसके नेता सदन छोड़कर चले जाते हैं। वैष्णव ने दावा किया कि एसआईआर पर चर्चा के दौरान भी कांग्रेस वॉकआउट करेगी, क्योंकि उसके पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है।
वैष्णव ने कांग्रेस के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि 1975 में आपातकाल लगाना, मंत्रिमंडल से स्वीकृत अध्यादेश को प्रेस क्लब में फाड़ना और संविधान की व्यवस्था से अलग राष्ट्रीय सलाहकार परिषद का गठन करना कांग्रेस के संवैधानिक रवैये को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस को संविधान से अधिक वोट बैंक की राजनीति में विश्वास रहा है। अब देश की जनता विकास की राजनीति चाहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत समृद्ध, सशक्त और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

















