जयपुर। राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन माहुरंगून’ के तहत कार्रवाई करते हुए दो साल से फरार 25 हजार रुपए के इनामी तस्कर ब्रह्मालाल को महाराष्ट्र के नंदुरबार से गिरफ्तार किया है। आरोपी अपनी पहचान छिपाकर क्रेशर प्लांट पर मजदूर और ट्रैक्टर चालक बनकर रह रहा था। पुलिस से बचने के लिए उसने मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी बंद कर दिया था।
एएनटीएफ आईजी विकास कुमार ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी ब्रह्मालाल (50) निवासी आसींद जिला भीलवाड़ा है। आरोपी पर जोधपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक की ओर से 25 हजार रुपए का इनाम घोषित था।
एएनटीएफ आईजी के अनुसार अनपढ़ ब्रह्मालाल बचपन से खेती-बाड़ी और मवेशी चराने का काम करता था। बाद में ट्रैक्टर और ट्रक चलाना सीखा तथा खुद का ट्रक खरीदकर किराए पर चलाने लगा। ट्रक की किश्तें नहीं चुका पाने के कारण आर्थिक तंगी में वह तस्करों के संपर्क में आया। इसके बाद ट्रक में अन्य सामान के साथ गांजा, डोडा-पोस्त और अफीम की तस्करी करने लगा। तस्करी से अधिक कमाई होने लगी तो उसने इसे ही अपना मुख्य धंधा बना लिया।
वर्ष 2024 में जोधपुर ग्रामीण के आसोप थाना पुलिस ने ब्रह्मालाल के ट्रक को डोडा-चूरा के साथ पकड़ा था। इसके बाद वह गांव छोड़कर फरार हो गया। फरारी के दौरान पहले गुजरात के सोनगढ़ स्थित क्रेशर प्लांट पर मजदूरी की। बाद में भीलवाड़ा के एक परिचित के माध्यम से महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले के डेकवड क्षेत्र में पहुंच गया। यहां करीब एक साल से पहचान छिपाकर क्रेशर प्लांट पर मजदूरी करने के साथ ट्रैक्टर चला रहा था।
एएनटीएफ को नंदुरबार से मुखबिर के जरिए संदिग्ध व्यक्ति की गुप्त फोटो मिली। फोटो के आधार पर उसकी पहचान ब्रह्मालाल के रूप में हुई। इसके बाद विशेष टीम महाराष्ट्र पहुंची और गिट्टी खरीदार बनकर क्रेशर प्लांट की रेकी शुरू की। भीलवाड़ा के मजदूरों की जानकारी मिलने पर टीम करीब 5-6 किलोमीटर पैदल चलकर डेकवड क्रेशर प्लांट तक पहुंची।
प्लांट पर टीम ने ट्रैक्टर चला रहे एक व्यक्ति को घेरा और नाम पूछा। उसने खुद को ‘धर्मा’ बताया, लेकिन पहले से पहचान की पुष्टि होने के कारण टीम ने सख्ती से पूछताछ की। इसके बाद उसने अपना नाम ब्रह्मालाल होना स्वीकार कर लिया। टीम ने उसे गिरफ्तार किया गया।



















