जयपुर। लॉरेंस बिश्नोई गैंग के सक्रिय सदस्य और विदेश में बैठकर भारत में रंगदारी, हत्या तथा फायरिंग की वारदातों को अंजाम दिलाने वाले हरिचंद जाट उर्फ हरि बॉक्सर को राजस्थान पुलिस की एटीएस-एजीटीएफ के प्रयासों से अमेरिका में डिटेन कर लिया गया है। अमेरिकी एजेंसी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (आईसीई) ने उसे हिरासत में लिया है। अब उसे भारत लाने की कार्रवाई की जा रही है।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एटीएस/एजीटीएफ/एएनटीएफ) दिनेश एमएन ने बताया कि एजीटीएफ ने अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर आरोपी की लोकेशन का पता लगाया और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए।
हरिचंद जाट उर्फ हरि बॉक्सर (40) निवासी बासदयाल जिला कोटपूतली-बहरोड़ का रहने वाला है। वह विदेश में रहकर लॉरेंस बिश्नोई और रोहित गोदारा गिरोह के लिए भारत में आपराधिक गतिविधियों का संचालन कर रहा था।
गैंग के लिए हथियारों की आपूर्ति की अहम जिम्मेदारी
एमएन के अनुसार हरि बॉक्सर लॉरेंस बिश्नोई और रोहित गोदारा के जबरन वसूली गिरोह का सक्रिय सदस्य है। वह गिरोह के लिए हथियारों की आपूर्ति करने और वारदातों को अंजाम देने में अहम भूमिका निभाता था। गिरोह के सदस्य व्हाट्सऐप और सिग्नल के जरिए इंटरनेट आधारित वीओआईपी कॉल तथा वीपीएन का इस्तेमाल कर अमीर व्यापारियों को धमकियां देते हैं। रंगदारी की रकम नहीं देने पर संबंधित व्यक्ति या उसके परिवार पर गोलीबारी करवाई जाती है।
हरि बॉक्सर राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में रंगदारी की धमकियों तथा फायरिंग की वारदातों में सक्रिय रहा है। अप्रैल 2023 में अपने ही पासपोर्ट का इस्तेमाल कर वह भारत से विदेश फरार हो गया था। मुंबई में बॉलीवुड निर्देशक रोहित शेट्टी के घर के बाहर फायरिंग करवाने के बाद उसने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर इसकी जिम्मेदारी भी ली थी।
राजस्थान में 22 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज
हरि बॉक्सर के खिलाफ राजस्थान के विभिन्न थानों में हत्या के प्रयास, रंगदारी, आर्म्स एक्ट, संगठित अपराध, चोरी और मारपीट सहित गंभीर धाराओं में 22 से अधिक प्रकरण दर्ज हैं। वह आर्म्स एक्ट के प्रकरण में भी वांछित था। उसके खिलाफ सीबीआई और इंटरपोल के समन्वय से 14 नवंबर 2024 को रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाया गया था।
दुबई से डोमिनिकन रिपब्लिक और फिर अमेरिका पहुंचा
एजीटीएफ की जांच में सामने आया कि भारत से फरार होने के बाद हरि बॉक्सर पहले दुबई पहुंचा। इसके बाद वह डोमिनिकन रिपब्लिक गया और वहां से मैक्सिको बॉर्डर के रास्ते डंकी रूट से अमेरिका पहुंच गया। बाद में उसने कैलिफोर्निया में ठिकाना बना लिया।
उप महानिरीक्षक पुलिस (एटीएस एवं इंटरपोल लाइजनिंग ऑफिसर) योगेश यादव के सुपरविजन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सिद्धांत शर्मा के नेतृत्व में गठित टीम ने आसूचना तंत्र और विश्वसनीय सूत्रों के माध्यम से उसकी गतिविधियों की जानकारी जुटाई। इसके बाद ये सूचनाएं एजीटीएफ की इंटरपोल शाखा को उपलब्ध करवाई गईं।
इंटरपोल शाखा के प्रभारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरोत्तम लाल वर्मा और उनकी टीम ने सीबीआई के माध्यम से करीब पांच देशों को 14 बार इंटरपोल रेफरेंस भेजे। इनमें आरोपी की लोकेशन और आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल किए जा रहे विदेशी मोबाइल नंबरों से संबंधित सूचनाएं शामिल थीं।
गुयाना से भी भागने में रहा था सफल
फरवरी 2025 में हरि बॉक्सर की लोकेशन गुयाना में मिलने पर उसके खिलाफ अस्थायी गिरफ्तारी अनुरोध (प्रोविजनल अरेस्ट रिक्वेस्ट) भेजा गया था, लेकिन इसी दौरान वह गुयाना से डंकी रूट के जरिए मैक्सिको होते हुए अमेरिका भाग गया। इसके बावजूद एजीटीएफ ने उसका पीछा जारी रखा।
दिसंबर 2024 से जुलाई 2026 के बीच उसकी गतिविधियों और ठिकाने से जुड़ी पुख्ता जानकारी के आधार पर अमेरिका को नौ इंटरपोल नोटिस भेजे गए। इसके अलावा 21 फरवरी 2025 को अस्थायी गिरफ्तारी अनुरोध, 19 अगस्त 2026 को अद्यतन विस्तृत दस्तावेज और 29 अक्टूबर 2026 को उसके फिंगरप्रिंट भी उपलब्ध करवाए गए। लगातार सूचनाएं साझा करने और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से समन्वय के बाद अमेरिकी एजेंसी आईसीई ने उसे डिटेन कर लिया।
तकनीकी विश्लेषण से मिली अहम जानकारी
हरि बॉक्सर की ओर से अलग-अलग विदेशी मोबाइल नंबरों के जरिए धमकियां देने और सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी करने के मामलों में एजीटीएफ की तकनीकी टीम लगातार निगरानी कर रही थी। टीम के सहायक उपनिरीक्षक मोहन भूरिया और कांस्टेबल जगसीर सिंह ने विभिन्न मोबाइल नंबरों का तकनीकी विश्लेषण कर महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाईं। विश्वसनीय सूत्रों से यह भी पता चला कि वह पासपोर्ट नंबर X6875815 का इस्तेमाल कर भारत से फरार हुआ था।
इन पुलिस अधिकारियों और जवानों की रही अहम भूमिका
इस पूरी कार्रवाई में उप महानिरीक्षक पुलिस योगेश यादव के सुपरविजन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सिद्धांत शर्मा के नेतृत्व में उप अधीक्षक रविन्द्र प्रताप तथा पुलिस निरीक्षक सुनील जांगिड़, मनीष शर्मा और रामविलास विश्नोई की ऑपरेशनल टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वहीं इंटरपोल शाखा में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरोत्तम लाल वर्मा के नेतृत्व में टीम ने सीबीआई के माध्यम से विभिन्न देशों को रेफरेंस भेजने, रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाने और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध करवाने का काम किया। टीम में तत्कालीन पुलिस निरीक्षक कमलपुरी, पुलिस निरीक्षक उम्मेद सिंह, सहायक उपनिरीक्षक रमेश कुमार, संतोष टेलर तथा कांस्टेबल महावीर प्रसाद, सुभाष, श्रवण, सुरेन्द्र और महिला कांस्टेबल सावित्री शामिल रहे।
राजस्थान एजीटीएफ की इस कार्रवाई को विदेश में बैठकर भारत में आपराधिक गतिविधियां संचालित करने वाले गैंगस्टरों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित पुलिस कार्रवाई की बड़ी सफलता माना जा रहा है। आरोपी को अमेरिका से भारत लाने के लिए आवश्यक कानूनी और अन्य प्रक्रियाएं जारी हैं।

















