जयपुर। राजधानी जयपुर के गलता गेट थाना क्षेत्र में सीआईडी (सीबी) और पुलिस की संयुक्त टीम ने “ऑपरेशन भगवान विष्णु” के तहत कार्रवाई करते हुए भगवान की प्राचीन दुर्लभ मूर्ति को सोने की बताकर बेचने की कोशिश करने वाले एक आरोपी को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 21 इंच लंबा अष्टधातु का विग्रह बरामद किए हैं। समय रहते की गई इस कार्रवाई से दोनों धर्मों के लोगों के बीच सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास विफल हो गया।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (अपराध) बिपिन कुमार पाण्डेय ने बताया कि सीआईडी-सीबी की स्पेशल टीम के सहायक उपनिरीक्षक दुष्यन्त सिंह और हेड कांस्टेबल शाहिद अली को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कार्रवाई की शुरुआत करीब 15 दिन पूर्व हुई, जब सीआईडी (सीबी) के हेड कांस्टेबल शाहिद अली को गुप्त मुखबिर से सूचना मिली थी कि शहजाद नामक व्यक्ति के पास एक पुरानी सोने की मूर्ति उपलब्ध है और वह उसे बेचने की कोशिश कर रहा है।
सूचना को विकसित करने के बाद टीम ने आरोपी की पहचान और गतिविधियों पर नजर रखी। इसके बाद दोनों पुलिसकर्मियों ने बोगस ग्राहक बनकर आरोपी से संपर्क किया। आरोपियों ने शुरुआत में मूर्ति की कीमत 10 लाख रुपये मांगी, लेकिन बोगस ग्राहक बने शाहिद अली से मोलभाव के बाद सौदा 3,10,000 रुपये नगद में तय हुआ। इसके बाद गलतागेट थाना क्षेत्र में आरोपी से सौदेकी रकम 3 लाख 10 हजार रुपये भी सौंप दी गई।
उक्त रकम में ऊपर नीचे के दोनों असली थे बाकी सभी नोट भारतीय मनोरंजन बैंक के थे। जिसे बाद में थाना पुलिस ने आरोपी के पास से बरामद कर लिए। मूर्ति को देखने पर उसके सोने की नहीं होने का संदेह स्पष्ट हुआ। इसके बाद टीम ने तत्काल आरोपी को मौके पर ही दस्तयाब कर लिया। संबंधित पुलिस उपायुक्त उत्तर करण शर्मा के समन्वय से गलतागेट थानाधिकारी धर्मेन्द्र शर्मा को सूचना दी गई।
गलतागेट थाना पुलिस के जाप्ते की मदद से सूरजपोल अनाज मंडी के सामने आरोपी अब्दुल समद निवासी सलेमपुर, करौली को पकड़कर गिरफ्तार करवाया गया और आगे की कार्रवाई के लिए थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। पूछताछ में अब्दुल कादिर ने बताया कि सौदा पक्का होने के बाद मंगलवार 8 सितंबर की रात शहजाद के कहने पर अब्दुल समद ने अब्दुल कादिर को मूर्ति की डिलीवरी देने जयपुर भेजा और इस काम के बदले उसे 10,000 रुपये मिलने थे।
बरामद भगवान की मूर्ति को पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों से परीक्षण कराया जाएगा। परीक्षण के बाद यह स्पष्ट होगा कि मूर्ति कितनी पुरानी है, किस धातु की बनी है और इसका कोई ऐतिहासिक अथवा पुरातात्विक महत्व है या नहीं।
पुलिस अब आरोपी से पूछताछ के आधार पर यह भी पता लगाने का प्रयास करेगी कि मूर्ति उसे कहां से मिली और क्या इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह या नेटवर्क सक्रिय है। साथ ही मूर्ति की खरीद-फरोख्त से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
इस सम्पूर्ण कार्रवाई में सीआईडी (सीबी) के उप निरीक्षक शैलेन्द्र शर्मा कुशल नेतृत्व में सहायक उपनिरीक्षक दुष्यन्त सिंह और हेड कांस्टेबल शाहिद अली की विशेष भूमिका रही। हेड कांस्टेबल बृजेश कुमार, कृष्ण गोपाल और कुलदीप सिंह का भी सराहनीय योगदान रहा।
गलतागेट थाना पुलिस की ओर से थानाधिकारी धर्मेन्द्र कुमार शर्मा, सहायक उपनिरीक्षक बलबीर सिंह, हेड कांस्टेबल प्रदीप, कांस्टेबल विजय और राजू सिंह ने सहयोग किया।



















