मुनाफे की खातिर सेहत से खिलवाड़: मिलावट का कारोबार बेलगाम

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दिनेश कुमार सैनी

जयपुर। जिस दूध को पोषण और स्वास्थ्य का आधार माना जाता है, वही आज मिलावटखोरों की कमाई का सबसे बड़ा जरिया बनता जा रहा है। प्रदेश में समय-समय पर मिलावटी दूध, मावा, घी, तेल और मिर्च-मसालों के बड़े मामले सामने आने के बावजूद इस पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। लगातार हो रही कार्रवाई के बावजूद मिलावट का कारोबार जारी रहने से खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

प्रदेश में आए दिन मिलावटी खाद्य पदार्थों की खेप पकड़ी जा रही है, लेकिन इसके बावजूद बाजार में मिलावट का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा। ऐसे में आम उपभोक्ता के सामने यह चिंता बनी हुई है कि उसके घर पहुंचने वाला दूध और अन्य खाद्य पदार्थ शुद्ध हैं या उनमें हानिकारक रसायनों की मिलावट की गई है।

कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल

लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद आम लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि विभाग की कार्रवाई वास्तव में प्रभावी होती तो मिलावटखोर बार-बार सक्रिय कैसे हो जाते। लोगों का मानना है कि त्योहारों के दौरान सैंपलिंग और छापेमारी तो होती है, लेकिन वर्षभर चलने वाले मिलावट के कारोबार पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है। इससे कानून का डर भी कम होता दिखाई दे रहा है।

स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार दूध और अन्य खाद्य पदार्थों में डिटर्जेंट, यूरिया, सिंथेटिक केमिकल और अन्य हानिकारक पदार्थों की मिलावट गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है। इन रसायनों का सबसे अधिक असर किडनी, लिवर और पाचन तंत्र पर पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए ऐसे मिलावटी खाद्य पदार्थ सबसे अधिक नुकसानदायक साबित हो सकते हैं।

जनता के सामने बड़ा सवाल

लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच लोगों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि वे अपनी मेहनत की कमाई से शुद्ध खाद्य पदार्थ खरीद रहे हैं या बीमारियां। लोगों का कहना है कि जब सरकार के पास खाद्य सुरक्षा के लिए अलग विभाग, कानून और जांच की व्यवस्थाएं मौजूद हैं, तब भी मिलावट के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण क्यों नहीं हो पा रहा है।

कड़े कदम उठाने की मांग

लोगों और विशेषज्ञों का मानना है कि मिलावट पर अंकुश लगाने के लिए केवल मौसमी अभियान पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए पूरे वर्ष नियमित औचक निरीक्षण और सैंपलिंग की आवश्यकता है। साथ ही जांच रिपोर्ट का त्वरित निस्तारण कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। मिलावट के गंभीर मामलों में दोषियों की संपत्ति जब्त करने और उनके व्यापारिक लाइसेंस निरस्त करने जैसे सख्त कदम उठाने की भी मांग की जा रही है।

वहीं लगातार सामने आ रहे मिलावट के मामलों के बीच आम लोगों का कहना है कि आखिर मिलावटखोरों पर प्रभावी और कड़ी कार्रवाई कब होगी और कब तक कुछ लोगों के मुनाफे के लिए आमजन की सेहत से खिलवाड़ होता रहेगा।

खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश में खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ विभाग की ओर से लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। नियमित रूप से औचक निरीक्षण, सैंपलिंग और छापेमारी की जा रही है। जांच में खाद्य पदार्थ अमानक या मिलावटी पाए जाने पर संबंधित खाद्य कारोबारियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। विभाग का उद्देश्य आमजन को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना है और मिलावट करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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