सरकारी योजना और कैशबैक के नाम पर की जा रही साइबर ठगी

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Police headquarters issued advisory regarding cyber fraud
Police headquarters issued advisory regarding cyber fraud

जयपुर। सरकारी योजनाओं में आर्थिक सहायता और कैशबैक का लालच देकर की जा रही साइबर ठगी को लेकर राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने आमजन के लिए एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर जनप्रतिनिधियों के नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल कर चलाए जा रहे फर्जी विज्ञापनों से सतर्क रहने की अपील की है।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि ठग प्रमुख सार्वजनिक और राजनीतिक हस्तियों की फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर नकली सरकारी योजनाओं का प्रचार करते हैं। लोगों को आर्थिक सहायता दिलाने का झांसा देकर फर्जी वेबसाइट, फोन नंबर और व्हाट्सएप खातों के जरिए संपर्क किया जाता है।

ठग कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार या बदले हुए वीडियो के जरिए ऐसा दिखाते हैं, मानो कोई जनप्रतिनिधि स्वयं योजना की घोषणा कर रहा हो। विज्ञापन पर क्लिक करने के बाद लोगों को फोन नंबर या वेबसाइट पर भेजा जाता है। कुछ मामलों में +92 कोड वाले विदेशी नंबरों से संपर्क कर बताया जाता है कि व्यक्ति का आर्थिक सहायता के लिए चयन हो गया है।

इसके बाद पंजीकरण शुल्क, प्रक्रिया शुल्क, कर या सत्यापन शुल्क के नाम पर बार-बार पैसे मांगे जाते हैं। भुगतान करने के बाद भी योजना का लाभ नहीं मिलता और पीड़ित से लगातार रकम वसूली जाती है।

पुलिस के अनुसार स्क्रैच कार्ड और स्पिन-एंड-विन प्रतियोगिताओं के जरिए नकली कैशबैक या पुरस्कार जीतने का संदेश भेजा जाता है। इसके बाद भुगतान ऐप पर यूपीआई कलेक्ट रिक्वेस्ट स्वीकार करने या यूपीआई पिन दर्ज करने के लिए कहा जाता है। ऐसा करने पर खाते से रकम कटकर ठगों के खातों में जा सकती है।

राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी सोशल मीडिया विज्ञापन पर भरोसा करने से पहले संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर योजना की पुष्टि करें। जनप्रतिनिधि या उनके कार्यालय के नाम पर +92 नंबर से कॉल या संदेश आने पर सतर्क रहें और संबंधित कार्यालय से सीधे संपर्क करें।

पुलिस ने स्पष्ट किया कि यूपीआई पिन केवल भुगतान करने के लिए दर्ज किया जाता है, पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं। किसी अनजान व्यक्ति के साथ आधार, पैन, बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी या यूपीआई पिन साझा न करें। जनप्रतिनिधियों के वीडियो और ऑडियो संदेशों की प्रामाणिकता भी आधिकारिक स्रोतों से जांचें। संदिग्ध विज्ञापनों और खातों को संबंधित सोशल मीडिया मंच पर रिपोर्ट करें तथा साक्ष्य सुरक्षित रखें। बिना पुष्टि ऐसे संदेशों को आगे साझा करने से भी बचें।

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