विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी में दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की ‘चतुर्थ आर.के. रस्तोगी मेमोरियल नेगोशिएशन प्रतियोगिता’ का शुभारंभ

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जयपुर। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस एन.वी. अंजारिया बोले- “स्वामी विवेकानंद जी मेरे सबसे पसंदीदा व्यक्ति हैं, इसलिए वीजीयू में इस कार्यक्रम में शामिल होना मेरे लिए बेहद आत्मीय और हृदयस्पर्शी है”; अदालतों के बाहर मामलों का निपटारा समय और ऊर्जा की बचत का अचूक मार्ग विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी, जयपुर के विधि विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की “चतुर्थ वीजीयू आर.के. रस्तोगी मेमोरियल नेगोशिएशन प्रतियोगिता” का भव्य और गरिमामय शुभारंभ शनिवार को विश्वविद्यालय के मुख्य सभागार में संपन्न हुआ।

देश भर के अग्रणी विधिक संस्थानों, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों एवं विधि संकायों से आए 60 प्रतिष्ठित टीमों के विधि विद्यार्थियों के बीच यह तीन दिवसीय राष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। उद्घाटन समारोह में सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय, बार काउंसिल एवं अकादमिक जगत के मूर्धन्य विद्वानों ने शिरकत कर भावी अधिवक्ताओं को विधिक संवाद, मध्यस्थता और वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) के व्यावहारिक गुर सिखाए।

समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों एवं वीजीयू के शीर्ष प्रबंधन के गरिमामय आगमन के पश्चात दीप प्रज्वलन और मां सरस्वती की स्तुति के साथ हुआ। तत्पश्चात विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा मंचस्थ अतिथियों का आत्मीय अभिनंदन किया गया। स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए वीजीयू के चेयरपर्सन एवं पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. ललित के. पंवार ने समकालीन परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज पूरे विश्व में नेगोशिएशन (वार्ता और कूटनीति) का महत्व सर्वोपरि हो चुका है।

कार्यक्रम में पधारे अतिथियों एवं देश भर से आए प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एवं भारत के पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरलराजदीपक रस्तोगी ने मंचस्थ गणमान्य अतिथियों का अभिनंदन किया तथा सभा को स्वर्गीय आर.के. रस्तोगी द्वारा सिंचित उच्च नैतिक एवं विधिक मूल्यों तथा संस्कारों से अवगत कराया। विश्व इतिहास एवं संवाद की सर्वोपरि शक्ति का उल्लेख करते हुए उन्होंने वर्ष 1962 में संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस के बीच हुए ऐतिहासिक क्यूबा मिसाइल संकट के दौरान हुई द्विपक्षीय बातचीत का उदाहरण दिया।

उन्होंने कहा कि यदि उस नाजुक मोड़ पर दोनों देशों के मध्य कूटनीतिक वार्ता सफल न हुई होती, तो संपूर्ण विश्व तृतीय विश्व युद्ध की विभीषिका में प्रवेश करने के कगार पर था। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय संस्कृति के प्राचीन महाकाव्यों-रामायण और महाभारत में शांति वार्ता एवं मध्यस्थता के महती महत्व और प्रासंगिकता का उदाहरण प्रस्तुत किया।

उन्होंने कहा कि नेगोशिएशन केवल एक विधिक कौशल नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने और सामाजिक संतुलन बनाए रखने का सर्वोत्तम माध्यम है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इस मंच से बातचीत की बारीकियों और संयम को आत्मसात कर समाज के अंतिम व्यक्ति तक त्वरित व सुलभ न्याय पहुंचाएं।

उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि भारत के सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधिपति जस्टिस एन.वी. अंजारिया ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा कि “स्वामी विवेकानंद जी मेरे सबसे पसंदीदा व्यक्ति हैं, इसलिए विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी में आयोजित इस कार्यक्रम में शामिल होना मेरे लिए बेहद आत्मीय और हृदयस्पर्शी है।”

उन्होंने विश्वविद्यालय के सकारात्मक अकादमिक परिवेश, नवाचार और मूल्यपरक शिक्षा की सराहना की। वैकल्पिक विवाद समाधान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि न्याय का मूल उद्देश्य समाज में सौहार्द और परस्पर सहमति का निर्माण करना है, और युवाओं को अदालती मुकदमों की पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़कर आपसी समझ और सुलह की भावना को अपनाना चाहिए।समारोह के विशिष्ट अतिथि राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधिपति जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल ने कहा कि अधिकांश विवादों का सफल निपटारा अदालतों के बाहर सौहार्दपूर्ण ढंग से किया जा सकता है, जिससे पक्षकारों का बहुमूल्य समय और ऊर्जा बचती है।

वहीं विशिष्ट अतिथि माननीय न्यायमूर्ति आनंद ने युवा प्रतिभागियों को वैचारिक मंथन, पेशेवर नैतिकता और समस्या-समाधान की क्षमताओं को निखारने के लिए प्रेरित किया।समारोह में विश्वविद्यालय के संस्थापक एवं वाइस-चेयरपर्सन डॉ. के.आर. बागड़िया, संरक्षक एम.आर. बागड़िया, कुलपति प्रो. (डॉ.) डी.वी.एस. भगवानुलु तथा विधि विभागाध्यक्ष व कार्यक्रम संयोजिका डॉ. शिल्पा राव रस्तोगी ने भी अपने विचार साझा किए। उद्घाटन सत्र का समापन ‘जर्नी ऑफ वीजीयू’ की विशेष ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति एवं राष्ट्रगान के सामूहिक गायन के साथ हुआ, जिसके पश्चात प्रथम चरण की प्रतियोगिताएं आरंभ हुईं।

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