जयपुर। विदेश से जयपुर पहुंचने वाले संदिग्ध पार्सलों के जरिए मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले नेटवर्क पर अब जांच एजेंसियां शिकंजा कसेंगी। इसके लिए पार्सल भेजने वालों और प्राप्तकर्ताओं की पहचान, संयुक्त पूछताछ तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने पर जोर दिया गया है।
इस संबंध में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की जयपुर आंचलिक इकाई में राजस्थान के लिए तृतीय त्रैमासिक संयुक्त समन्वय समिति की बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता एनसीबी के पश्चिमी क्षेत्र के उप महानिदेशक मनीष कुमार ने की। राजस्थान एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के पुलिस महानिरीक्षक विकास कुमार सह-अध्यक्ष रहे।
पांच महत्वपूर्ण मामलों की समीक्षा
बैठक में पिछली बैठक के निर्देशों की पालना की समीक्षा के साथ पिछले तीन महीनों में दर्ज पांच महत्वपूर्ण मादक पदार्थ तस्करी के मामलों पर चर्चा हुई। इनमें केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो, राजस्व आसूचना निदेशालय, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स, राज्य पुलिस और एनसीबी की जयपुर व जोधपुर इकाइयों के मामले शामिल रहे। वाणिज्यिक मात्रा में मादक पदार्थों की बरामदगी, गुप्त निर्माण प्रयोगशालाओं और वित्तीय जांच की भी समीक्षा की गई।
अधिकारियों ने जिला, राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय तस्करी नेटवर्क की पहचान कर उन्हें ध्वस्त करने के लिए संयुक्त कार्रवाई पर जोर दिया। अफीम और पोस्त भूसे के अवैध परिवहन से जुड़े स्रोत क्षेत्रों, तस्करी मार्गों और इसमें शामिल लोगों की पहचान पर भी विचार-विमर्श हुआ।
बार-बार अपराध करने वालों पर नजर
बैठक में एनडीपीएस मामलों में लंबित मुकदमों, अभियोजन विभाग के साथ समन्वय और जमानत पर रिहा होने के बाद दोबारा अपराध करने वाले आरोपियों की निगरानी पर चर्चा हुई। इसके अलावा नशा मुक्ति केंद्रों की स्थिति और नशा मुक्त भारत अभियान के क्रियान्वयन की समीक्षा भी की गई।
बैठक में एनसीबी जोधपुर के आंचलिक निदेशक घनश्याम सोनी, एनसीबी जयपुर के आंचलिक निदेशक अभिषेक नारायण सिन्हा, एएनटीएफ के उप महानिरीक्षक अभिजीत सिंह, डीआरआई के अपर निदेशक डॉ. हेमंत कुमार और एनआईए के पुलिस अधीक्षक रवि चौधरी सहित विभिन्न केंद्रीय व राज्य स्तरीय एजेंसियों के अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में सभी एजेंसियों ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ समन्वित कार्रवाई, प्रभावी सूचना साझा करने और निर्धारित कार्यवाहियों का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई। इसे नारकोटिक्स कंट्रोल विजन 2026-29 के लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

















