जयपुर । राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने आमजन को सोशल मीडिया, व्हाट्सएप, एसएमएस और मोबाइल ऐप्स के जरिए फैल रहे “इंस्टेंट लोन” और तथाकथित “चाईनीज लोन ऐप” फ्रॉड से सतर्क रहने की एडवाइजरी जारी की है। साइबर अपराधी कम समय में बिना केवाईसी और बिना दस्तावेज के तुरंत लोन देने का झांसा देकर लोगों की निजी और वित्तीय जानकारी चुराकर आर्थिक व मानसिक शोषण कर रहे हैं।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक साइबर क्राइम वीके सिंह ने एडवाइजरी जारी कर बताया गया है कि वर्तमान समय में साइबर ठग सोशल मीडिया विज्ञापनों, एसएमएस, व्हाट्सएप मैसेज और मोबाइल ऐप्स के जरिए लोगों को “कम ब्याज”, “बिना डॉक्यूमेंट” और “पांच मिनट में अकाउंट में पैसा” जैसे आकर्षक ऑफर देकर फंसाते हैं।
जैसे ही व्यक्ति ऐसे ऐप डाउनलोड करता है, ऐप उससे कांटेक्ट लिस्ट, एसएमएस, गैलरी, माइक्रोफोन और लोकेशन जैसी कई संवेदनशील परमिशन मांगता है। अनजाने में अनुमति देने के बाद व्यक्ति के मोबाइल का पूरा डेटा अपराधियों के सर्वर तक पहुंच सकता है। यहां तक कि ऐप हटाने के बाद भी उसका डेटा उनके पास सुरक्षित रहता है।
ऐसे ऐप्स आमतौर पर सिबिल स्कोर या बैंकिंग प्रक्रिया की जांच नहीं करते। वे केवल यह देखते हैं कि मोबाइल में कितने संपर्क नंबर और कितनी निजी जानकारी मौजूद है, ताकि बाद में व्यक्ति पर दबाव बनाया जा सके।
शुरुआत में 3 हजार से 5 हजार रुपये तक की छोटी राशि देकर कुछ ही दिनों में मोटा ब्याज जोड़कर 8 हजार रुपये या उससे अधिक वसूला जाता है। भुगतान न करने पर अपराधी पीड़ित की निजी तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ कर उन्हें अश्लील रूप में बदलकर परिवार और दोस्तों को भेजने की धमकी देते हैं। कई मामलों में रिश्तेदारों और ऑफिस के लोगों को कॉल कर बदनाम करने का भी प्रयास किया जाता है, जिससे पीड़ित मानसिक तनाव में आ सकता है।
वीके सिंह ने बताया कि सुरक्षित रहने के लिए केवल उन्हीं ऐप्स से लोन लें जो आरबीआई द्वारा रजिस्टर्ड एनबएफसी या बैंकों से अधिकृत हों। यदि कोई लोन ऐप आपकी “फोटो” या ” कॉन्टैक्ट लिस्ट” का एक्सेस मांगता है, तो समझ लें कि वह फर्जी है। लोन के लिए इन जानकारियों की आवश्यकता नहीं होती।
ऐप डाउनलोड करने से पहले ‘आलोचनात्मक समीक्षाएँ’ जरूर पढ़ें। रेटिंग्स पर भरोसा न करें, वे अक्सर खरीदी हुई (फेक) होती हैं। कोई भी असली बैंक लोन अप्रूवल से पहले ‘प्रोसेसिंग फीस’ के नाम पर पैसे नहीं मांगता।



















