नीट परीक्षा समाप्त करने की मांग तेज: नई शिक्षा नीति पर राष्ट्रीय बहस छेड़ने का आह्वान

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जयपुर। नीट परीक्षा 2026 में पेपर लीक और लगातार सामने आ रही अनियमितताओं के बाद अब देशभर में परीक्षा प्रणाली को लेकर विरोध तेज होने लगा है। राष्ट्रीय यूनाइटेड बैकवर्ड क्लासेज (एनयूबीसी) सहित राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अल्पसंख्यक महासंघ ने केंद्र सरकार से नीट परीक्षा को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की मांग उठाई है।

महासंघ के पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को संबोधित मांग पत्र में कहा कि नीट परीक्षा के दौरान लगातार पेपर आउट, तकनीकी गड़बड़ियों और अनियमितताओं ने लाखों विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को मानसिक तनाव में डाल दिया है। उनका कहना है कि बार-बार सामने आ रहे विवादों से परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

महासंघ ने सुझाव दिया कि मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए 12वीं कक्षा की मेरिट आधारित प्रणाली लागू करने पर विचार किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे विद्यार्थियों को अत्यधिक मानसिक दबाव, महंगी कोचिंग संस्कृति और प्रतियोगी परीक्षा के तनाव से राहत मिल सकेगी।

एनयूबीसी के प्रदेश अध्यक्ष हनुमान सहाय सिरसी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सीताराम मीणा, प्रदेश महासचिव संगठन श्रवण कुमार मेहरड़ा तथा राष्ट्रीय मुख्य संरक्षक डॉ. मदन यादव ने देशभर के शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों और आमजन से इस मुद्दे पर व्यापक राष्ट्रीय बहस छेड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के हित में पारदर्शी, न्यायपूर्ण और भरोसेमंद शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

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