पदोन्नति में 2 वर्ष के शिथिलन पर शर्त हटाने की मांग को लेकर शहीद स्मारक पर कर्मचारियों का कैंडल मार्च

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जयपुर। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) एवं राजस्थान राज्य कर्मचारी संघ के आह्वान पर मंगलवार को प्रदेशभर के कर्मचारियों ने सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पदोन्नति में दिए गए 2 वर्ष के शिथिलन (Relaxation) पर लगाई गई ‘सशर्त’ व्यवस्था के विरोध में शहीद स्मारक पर कैंडल मार्च निकाला। कर्मचारियों ने इस निर्णय को भेदभावपूर्ण और अन्यायपूर्ण बताते हुए जोरदार विरोध दर्ज कराया।

क्या है विवाद?

सरकारी निर्णय के अनुसार जिन कर्मचारियों ने वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 एवं 2025-26 के दौरान 2 वर्ष के शिथिलन का लाभ लिया है, उन्हें आगामी पदोन्नति में इस वर्ष पुनः यह लाभ नहीं दिया जाएगा। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह शर्त योग्य और पात्र कर्मचारियों के साथ अन्याय है तथा इससे हजारों कर्मचारियों की पदोन्नति प्रभावित होगी।

कैंडल मार्च और विरोध

इसी मुद्दे को लेकर सैकड़ों कर्मचारियों ने शहीद स्मारक पर कैंडल मार्च निकालकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया और सरकार से तत्काल इस शर्त को समाप्त करने की मांग की। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय कर्मचारियों के हितों के विपरीत है और इससे कार्यरत कार्मिकों में भारी असंतोष है। उन्होंने मांग की कि शिथिलन संबंधी सभी पात्र कर्मचारियों को बिना किसी शर्त के पदोन्नति का लाभ दिया जाए।

प्रमुख पदाधिकारी रहे उपस्थित

इस विरोध प्रदर्शन में महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़, राजस्थान राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष शेर सिंह यादव, महासंघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष देवेंद्र सिंह नरूका सहित अजयवीर सिंह, प्रकाश यादव, राहुल यादव, ओमप्रकाश चौधरी, प्रवीण, गगन बाजिया, रणजीत चौधरी, चंद्रशेखर, सुरेन्द्र, रामचंद्र सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी पदाधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे।

आंदोलन की चेतावनी

कर्मचारी संगठनों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस ‘भेदभावपूर्ण शर्त’ को वापस लेकर संशोधित पदोन्नति आदेश जारी नहीं किए गए, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक एवं उग्र रूप दिया जाएगा।

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