भारतीय संस्कृति और संस्कारों की झलक बनी ‘धरोहर’

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जयपुर। गॉडशिप एकेडमी का 12वां वार्षिक उत्सव ‘धरोहर-द लेगेसी’ बिरला ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। समारोह में विद्यार्थियों ने भारतीय सभ्यता, संस्कृति, ज्ञान परंपरा और मानवीय मूल्यों पर आधारित प्रस्तुतियों से देश की समृद्ध विरासत के विविध रंग बिखेरे। कार्यक्रम का संदेश रहा कि हमारी वास्तविक धरोहर ऐतिहासिक इमारतें और भौतिक संपत्ति नहीं, बल्कि संस्कार, नैतिक मूल्य, पारिवारिक संबंध और पीढ़ियों से हस्तांतरित होता ज्ञान है।

समारोह के मुख्य अतिथि राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) के पुलिस महानिरीक्षक अजय पाल लांबा रहे। विशिष्ट अतिथि हरियाणा कौशल विकास मिशन की स्टेट टेक्निकल ऑफिसर और विद्यालय की पूर्व छात्रा डॉ. रुबीना बख्श तथा विशेष अतिथि डॉ. बीएल सोनी रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत प्राचीन गुरुकुल परंपरा की प्रस्तुति से हुई। विद्यार्थियों ने बताया कि गुरुकुल में शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं थी, बल्कि अनुशासन, आत्मनिर्भरता, प्रकृति से जुड़ाव, कर्तव्यबोध और जीवन जीने की कला भी सिखाई जाती थी। इसके बाद वेदों की ज्ञान परंपरा को प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों ने वेदों के माध्यम से भारतीय चिंतन, प्रकृति, जीवन और अस्तित्व से जुड़े विचारों को मंच पर उतारा।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में सिंधु घाटी सभ्यता, शिव तांडव, आयुर्वेद एवं योग, बिहू, सूफी संगीत और दक्षिण भारतीय शास्त्रीय नृत्य ने दर्शकों को आकर्षित किया। प्रस्तुतियों के माध्यम से भाषा, वेशभूषा और परंपराओं की विविधता के बावजूद भारतीय संस्कृति में एकता, सह-अस्तित्व और मानवीय संवेदना का संदेश दिया गया।

राजस्थान की ऐतिहासिक विरासत पर आधारित पन्ना धाय की गाथा समारोह का प्रमुख आकर्षण रही। विद्यार्थियों ने अपने पुत्र का बलिदान देकर राजकुमार उदय सिंह की रक्षा करने वाली पन्ना धाय के त्याग, निष्ठा और कर्तव्यपरायणता को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। वहीं संयुक्त परिवार पर आधारित प्रस्तुति में परिवार को बच्चे की पहली पाठशाला बताते हुए प्रेम, सहयोग, सम्मान और जिम्मेदारी जैसे मूल्यों का महत्व समझाया गया।

विद्यालय की निदेशक एवं प्रधानाचार्य डॉ. संगीता भवाल ने कहा कि सच्ची विरासत पुरानी इमारतों और तस्वीरों में नहीं, बल्कि गुणों, संस्कारों और नैतिक मूल्यों में सुरक्षित रहती है। इन्हें एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब हम दूसरों के बारे में सोचना शुरू करते हैं, तभी मानवता और संस्कारों का वास्तविक अर्थ सामने आता है।

उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल 2014 को जयपुर के बनीपार्क में स्थापित गॉडशिप एकेडमी भारतीय परंपराओं और आधुनिक शिक्षा के समन्वय से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रयासरत है। विद्यालय का उद्देश्य बच्चों को केवल किताबी शिक्षा देना नहीं, बल्कि जीवन के लिए शिक्षित और सक्षम बनाना है।

विद्यालय के चेयरमैन स्वराज शहीद भवाल ने अतिथियों का आभार जताते हुए कहा कि संस्थान पिछले 34 वर्षों से बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार देने का कार्य कर रहा है। जयपुर में विद्यालय 12 वर्षों से सेवाएं दे रहा है। उन्होंने कहा कि यहां से शिक्षा प्राप्त विद्यार्थी विभिन्न उच्च पदों पर कार्यरत हैं। समारोह की विशिष्ट अतिथि डॉ. रुबीना बख्श भी इसकी एक मिसाल हैं।

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