जयपुर। सुख-समृद्धि, धन-धान्य और खुशहाली का महापर्व दीपावली रविवार को श्रद्धा, उल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर घर-घर में माता महालक्ष्मी, भगवान गणेश और माता सरस्वती का पूजन कर सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना की जाएगी। दीपावली पर इस बार प्रदोष काल और स्थिर वृषभ लग्न में महालक्ष्मी पूजन का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पूजा करने का विशेष महत्व है। वहीं, घरों और प्रतिष्ठानों में दीप सजाने, रंग-बिरंगी रोशनी करने तथा मुख्य द्वार को सजाने की तैयारियां भी अंतिम चरण में हैं।
दो विशेष मुहूर्त में महालक्ष्मी पूजन श्रेष्ठ
पंडित राजेश कुमार शर्मा के अनुसार दीपावली पर मुख्य पूजन का श्रेष्ठ समय शाम 6:16 से 6:28 बजे तक तथा शाम 6:52 से 7:05 बजे तक रहेगा। इस दौरान प्रदोष काल, स्थिर वृषभ लग्न और कुंभ राशि के स्थिर नवांश का संयोग रहेगा। प्रदोष काल शाम 5:30 से रात 8:14 बजे तक रहेगा, जबकि वृषभ लग्न शाम 6:30 से रात 8:01 बजे तक रहेगा। व्यापारियों के लिए बही-खाता पूजन का शुभ समय सिंह लग्न में रात 12:34 से 2:50 बजे तक रहेगा। इसके अलावा शाम 5:36 से रात 10:32 बजे तक शुभ, अमृत और चर चौघड़िया में भी पूजन किया जा सकेगा।
दिशा के अनुसार करें रोशनी और सजावट
दीपावली पर घरों और दुकानों में रोशनी का विशेष महत्व है। पंडित राजेश कुमार शर्मा के अनुसार वास्तु शास्त्र के मुताबिक भवन और दुकान की दिशा के अनुसार बल्बों के रंगों का चयन करना चाहिए। पूर्वमुखी भवन और दुकान में पीले रंग के बल्ब अधिक तथा नीले रंग के कम लगाने चाहिए। दक्षिणमुखी भवन में लाल रंग की रोशनी अधिक रखनी चाहिए। पश्चिममुखी भवन में नीले और सफेद रंग के बल्बों को प्राथमिकता देनी चाहिए, जबकि उत्तरमुखी भवन में सफेद और हरे रंग के बल्ब अधिक लगाने चाहिए।
उनके अनुसार घर में लक्ष्मी पूजन उत्तर या पूर्व दिशा में करना शुभ माना जाता है। यदि इन दिशाओं में पूजा संभव नहीं हो तो पश्चिम दिशा में भी पूजन किया जा सकता है। पूजा के दौरान श्रद्धालुओं का मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। पूजन स्थल पर मिट्टी से बनी लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाओं के साथ श्री यंत्र और कुबेर यंत्र की स्थापना भी शुभ मानी जाती है।
मुख्य द्वार पर बनाएं स्वस्तिक और शुभ-लाभ
दीपावली पर घर की साफ-सफाई, रंग-रोगन और व्यवस्थित वातावरण का विशेष महत्व है। घर से अनावश्यक सामान हटाकर मुख्य द्वार को आकर्षक ढंग से सजाना चाहिए। मुख्य द्वार की देहरी, चौक और आंगन में हिरमच, कली और चूना पाउडर से पारंपरिक मांडणे बनाने चाहिए। दरवाजों पर बंधनवार बांधने के साथ दोनों ओर लाल कुमकुम से स्वस्तिक बनाकर उसके आसपास शुभ-लाभ लिखना चाहिए।
पूजन में इन बातों का रखें ध्यान
पंडित शर्मा के अनुसार दीपावली पूजन के दौरान काले वस्त्र पहनने से बचना चाहिए। परिवारजनों और मित्रों को मिठाइयां व उपहार बांटने के साथ जरूरतमंद कन्याओं को मिठाई और कपड़े दान करना शुभ माना जाता है। उपहार में पटाखे, काले चमड़े की वस्तुएं और चाकू जैसी चीजें देने से बचना चाहिए।
दीपावली की रात घर के मंदिर, लक्ष्मी पूजन स्थल, आंगन और मुख्य द्वार की चौखट पर दीपक जलाने की परंपरा है। आसपास के मंदिरों में भी दीप प्रज्वलित करने चाहिए। घर के पास पीपल या बेलपत्र का पेड़ हो तो उसके नीचे तथा नजदीकी चौराहे पर भी दीपक जलाने का महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ दोष की शांति के लिए श्मशान में भी दीपक प्रज्वलित किए जाते हैं।
पटाखे चलाने में अग्नि सुरक्षा का रखें ध्यान
वास्तु के अनुसार पटाखे अग्नि तत्व से संबंधित हैं और इन्हें चलाने के लिए आग्नेय कोण उपयुक्त माना गया है। वहीं, ईशान कोण में पटाखे चलाने या अग्नि तत्व बढ़ाने वाली वस्तुएं रखने से बचने की सलाह दी गई है। पटाखे हमेशा खुले और सुरक्षित स्थान पर चलाने चाहिए। इस दौरान अग्नि सुरक्षा और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना जरूरी है।
10 नवंबर को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट
दीपावली के दो दिन बाद 10 नवंबर, मंगलवार को गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट महोत्सव मनाया जाएगा। इस दिन घरों और मंदिरों में गोबर से भगवान गिरिराज का प्रतीकात्मक स्वरूप बनाकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी। मंदिरों में भगवान को छप्पन भोग और नए अनाजों का भोग अर्पित किया जाएगा। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा पर सूर्यास्त के समय चंद्र दर्शन और तिथि की गणना को ध्यान में रखते हुए 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा करना शास्त्रसम्मत बताया गया है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत धारण कर ब्रजवासियों की रक्षा की थी। गोवर्धन पूजा का पर्व प्रकृति संरक्षण, गौसेवा और पर्यावरण के प्रति कृतज्ञता का संदेश देता है। इस दिन मंदिरों में अन्नकूट के आयोजन के साथ श्रद्धालु भगवान गिरिराज की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।

















