संत का श्राप भी वरदान बन जाता है: मुरलीधर महाराज

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Even a saint's curse can turn into a blessing: Murlidhar Maharaj
Even a saint's curse can turn into a blessing: Murlidhar Maharaj

जयपुर। दिल्ली रोड स्थित प्राचीन खोले के हनुमान मंदिर में चल रही नौ दिवसीय श्रीरामकथा के तीसरे दिन संत मुरलीधर महाराज ने भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं, अहिल्या उद्धार और प्रभु के दिव्य स्वरूप का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा का आयोजन हनुमंत धाम एवं श्री नरवर आश्रम के संस्थापक ब्रह्मलीन राधेलाल चौबे महाराज की प्रेरणा और आशीर्वाद से शर्मा परिवार की मेजबानी में हो रहा है।

अहिल्या उद्धार का प्रसंग सुनाते हुए मुरलीधर महाराज ने कहा कि कभी-कभी संत का श्राप भी वरदान बन जाता है। उन्होंने बताया कि गुरु विश्वामित्र भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को लेकर जनकपुर जा रहे थे। रास्ते में महर्षि गौतम का वीरान आश्रम देखकर श्रीराम ने इसका कारण पूछा। विश्वामित्र ने बताया कि महर्षि गौतम के श्राप के कारण उनकी पत्नी अहिल्या शिला रूप में थीं।

कथा के अनुसार, भगवान श्रीराम ने शिला को अपने चरणों से स्पर्श किया तो अहिल्या श्राप से मुक्त होकर अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट हो गईं। अहिल्या ने प्रभु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि उन्हें श्राप नहीं मिलता, तो भगवान के साक्षात दर्शन का सौभाग्य कैसे प्राप्त होता। इस मार्मिक प्रसंग को सुनकर अनेक श्रद्धालु भावुक हो गए।

इससे पहले महाराज ने भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव, भगवान शिव द्वारा उनके बाल स्वरूप के दर्शन, राजा दशरथ के चारों पुत्रों के नामकरण और बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने गुरु विश्वामित्र द्वारा यज्ञ की रक्षा के लिए श्रीराम और लक्ष्मण को साथ ले जाने के प्रसंग की भी व्याख्या की।

कथा का शुभारंभ मानस पूजन से हुआ। मंदिर अध्यक्ष गिरधारी लाल, महामंत्री बृज मोहन शर्मा, यजमान आनंदी लाल शर्मा, रामस्वरूप शर्मा सहित श्रद्धालुओं ने व्यास पीठ और श्रीरामचरितमानस का विधिवत पूजन किया। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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