जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शिखर अग्रवाल के एपीओ होने और 40 विला खरीद प्रकरण को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। शुक्रवार को सिविल लाइंस स्थित अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में उन्होंने मामले की जांच सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से कराने की मांग की। गहलोत ने कहा कि किसी अधिकारी को एपीओ करने से मामला खत्म नहीं हो जाता। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सामने आकर बताना चाहिए कि अब तक क्या कार्रवाई हुई है और आगे सरकार क्या कदम उठाएगी।
गहलोत ने मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के अधिकारियों और प्रदूषण नियंत्रण मंडल के तत्कालीन चेयरमैन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद लिए गए फैसलों की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने विदेश में मौजूद संबंधित अधिकारी दंपती से भारत लौटकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की अपील की। साथ ही अधिकारियों के बीच कथित विवाद से जुड़े एक आईजी की उदयपुर में पोस्टिंग पर भी सवाल उठाए। गहलोत ने उदयपुर विकास प्राधिकरण में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सरकार से जवाब मांगा।
रिश्तेदारों को सत्ता से दूर रखने की सलाह
गहलोत ने मुख्यमंत्री को एक बार फिर अपने रिश्तेदारों को सत्ता और प्रशासन से दूर रखने की सलाह दी। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के रिश्तेदारों के नाम भी विवादों में सामने आ रहे हैं। एक युवक का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि वह जयपुर में घूम रहा है, जबकि पुलिस रिकॉर्ड में फरार है। गहलोत ने कहा कि उनके कार्यकाल में उसे भरतपुर में पकड़ा गया था। उन्होंने मुख्यमंत्री की शपथ से पहले एक मामले को बंद किए जाने पर भी सवाल उठाए और सरकार से संबंधित व्यक्ति की मौजूदा स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
एसआईआर पर चुनाव आयोग को घेरा
गहलोत ने एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग पर एनडीए सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर के जरिए 13 करोड़ से अधिक वोट काटे गए हैं। सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की ओर से दिए गए हलफनामों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने न्यायपालिका और जांच एजेंसियों पर दबाव होने का आरोप लगाते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर चिंता जताई।
भाजपा के जवाबी अभियान पर भी निशाना
गहलोत ने दिल्ली में प्रस्तावित लोकतंत्र बचाओ रैली को लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा का अभियान बताया तथा लोगों से इसमें भागीदारी की अपील की। भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ अभियान पर उन्होंने कहा कि ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है कि विपक्ष की रैली के जवाब में सत्ता पक्ष को भी सड़क पर उतरना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार बदलने का रास्ता चुनाव है, रैली नहीं। रैलियां और प्रदर्शन जनता की आवाज सरकार तक पहुंचाने का माध्यम हैं।

















