अपरा एकादशी पर आज जल विहार करेंगे गोविंद देवजी

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Govind Devji will perform the 'Jal Vihar' ceremony today on the occasion of Apara Ekadashi.
Govind Devji will perform the 'Jal Vihar' ceremony today on the occasion of Apara Ekadashi.

जयपुर। ज्येष्ठ मास कृष्ण पक्ष की अपरा एकादशी 13 मई को श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाई जाएगी। इस अवसर पर श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर व्रत रखेंगे तथा मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों का भी विशेष महत्व रहेगा।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार एकादशी तिथि 12 मई को दोपहर 2.52 बजे प्रारंभ हुई और 13 मई को दोपहर 1.30 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत बुधवार को रखा जाएगा।

गोविंद देवजी मंदिर में इस अवसर पर विशेष श्रृंगार और जल विहार उत्सव का आयोजन होगा। मंदिर में ठाकुरजी को लाल रंग की सूती पोशाक धारण कराई जाएगी तथा ऋतु पुष्पों और गोचारण लीला के आभूषणों से अलंकृत किया जाएगा। राजभोग झांकी में जल विहार की आकर्षक झांकी सजाई जाएगी, जिसमें ठाकुर जी चांदी की कमलनुमा होदी में विराजमान होकर सुगंधित जलधारा में स्नान करेंगे।

डॉ. महेन्द्र मिश्रा ने बताया कि अधिकमास के कारण इस बार श्रद्धालुओं को एक ही मास में चार एकादशी व्रत रखने और दान-पुण्य करने का विशेष अवसर मिलेगा। इनमें अपरा एकादशी, पद्मिनी एकादशी, परमा एकादशी और निर्जला एकादशी प्रमुख हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा, नियम और भक्ति के साथ एकादशी व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।

उन्होंने बताया कि निर्जला एकादशी को सबसे कठिन और पुण्यदायी व्रत माना जाता है, जबकि अधिक मास में आने वाली पद्मिनी एकादशी का भी सनातन धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।

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