मंदिर-मस्जिद हटाने की कार्रवाई पर हनुमान बेनीवाल ने उठाए सवाल

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Hanuman Beniwal's Security Downgraded
Hanuman Beniwal's Security Downgraded

जयपुर। नागौर सांसद एवं राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल ने जयपुर में मंदिरों, मस्जिदों और अन्य धार्मिक स्थलों को हटाने की कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान में भजनलाल सरकार द्वारा शुरू की गई यह कार्रवाई पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के शासनकाल की याद दिलाती है, जब विकास कार्यों के नाम पर कई धार्मिक स्थलों को जनता की सहमति और पर्याप्त संवाद के बिना हटाया गया था।

बेनीवाल ने मंगलवार को जारी प्रेस वक्तव्य में कहा कि मामला केवल किसी एक मंदिर या मस्जिद का नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि जयपुर में मस्जिद को ध्वस्त किए जाने की कार्रवाई के विरोध में कुछ मुस्लिम विधायकों ने अपनी बात रखी, लेकिन वर्षों तक मुस्लिम समुदाय के समर्थन से राजनीति करने वाले कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं की चुप्पी भी सवाल खड़े करती है। उन्होंने पूछा कि क्या सत्ता और विपक्ष के कुछ प्रमुख नेताओं के बीच धार्मिक आस्थाओं से जुड़े मामलों में कोई मौन सहमति बन चुकी है।

सांसद ने कहा कि विकास किसी भी लोकतांत्रिक सरकार का दायित्व है और वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर लोगों की भावनाओं, धार्मिक विश्वासों और ऐतिहासिक विरासत की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। यदि सड़क, परियोजना या सौंदर्यीकरण के नाम पर मंदिरों और मस्जिदों को हटाया जाता है तो उससे पहले संबंधित समुदायों से संवाद, सहमति और विश्वास निर्माण की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतंत्र बुलडोजर की ताकत से नहीं, बल्कि जनता के विश्वास से चलता है। बेनीवाल ने यह भी सवाल उठाया कि ऐसी प्रशासनिक कार्रवाइयों के दौरान बार-बार इंटरनेट सेवाएं बंद करने की नौबत क्यों आती है। उन्होंने कहा कि इंटरनेट बंद होने का सबसे अधिक नुकसान आम नागरिकों को उठाना पड़ता है। डिजिटल भुगतान प्रभावित होते हैं, छोटे व्यापारियों, सब्जी विक्रेताओं और ऑनलाइन सेवाओं से जुड़े हजारों युवाओं की आजीविका पर असर पड़ता है। साथ ही यात्रियों को टिकट, बैंकिंग और अन्य आवश्यक सेवाओं में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

बेनीवाल ने कहा कि यदि किसी प्रशासनिक कार्रवाई के लिए बार-बार इंटरनेट बंद करना पड़े तो यह सरकार की संवाद स्थापित करने और सामाजिक सहमति बनाने में विफलता का संकेत है। उन्होंने कहा कि संवाद की कमी और जनभागीदारी की उपेक्षा ही तनाव की सबसे बड़ी वजह बनती है।

उन्होंने कहा कि राजस्थान पहले ही देश के उन राज्यों में शामिल रहा है जहां जम्मू-कश्मीर के बाद सबसे अधिक बार इंटरनेट सेवाएं बंद की गई हैं। यह स्थिति डिजिटल अर्थव्यवस्था और आधुनिक शासन व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

बेनीवाल ने सरकार से विकास और विरासत, प्रशासन और आस्था तथा कानून और जनविश्वास के बीच संतुलन स्थापित करने की मांग करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता की भावनाओं को दरकिनार कर किया गया विकास विवाद का कारण बनता है, जबकि संवाद और सहमति से किया गया विकास स्थायी और सर्वस्वीकार्य होता है।

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