नेट-थियेट पर भजनों की स्वर्ग गंगा:करनी कुछ ना करी, तुम मेरी राखो लाज हरि

जयपुर। नेट-थियेट कार्यक्रमों की श्रृंखला में आज भजन की स्वर गंगा कार्यक्रम में भजन कलाकार गौरव भट्ट ने अपनी मधुर वाणी से भजन की ऐसी सरिता प्रवाहित कि की लोग भक्ति रस में हिलोरे लेन लगे । नेट-थियेट के राजेन्द्र शर्मा राजू ने बताया कि कलाकार गौरव ने अपने कार्यक्रम की शुरूआत सुरदास के भजन प्रभु मेरे अवगुण चित्त‌ ना धरो, समदर्शी प्रभु नाम तिहारो,चाहो तो पार करो* सुनाकर भजन की शुरुआत की।

इसके बाद मीराबाई का भजन दरस बिना दुखन लागै नैन और फिर गुरुनानक की वाणी काहे रे बन खोजने जाई,सख निवासी सदा अलेपा तोही संगि समाई जैसे भजनों को बडे ही सुरीले अंदाज में प्रस्तुत कर सभी को मंत्रमुग्ध किया और अंत में तुम मेरी लाखों लाज हरि, तुम जानत सब अंतर्यामी,करनी कछु ना करी, सुनाकर श्रोताओं को भजनों की स्वर् गंगा में डुबकी लगवाई ।

इनके साथ सितार पर हरिहर शरण भट्ट और तबले पर विजय बानेत ने असरदार संगतकर भजनों की इस सुरीली शाम को भक्तिमय बना दिया l कार्यक्रम का संचालन सुप्रसिद्ध उद्घोषक आर डी अग्रवाल ने किया।
संयोजक नवल डांगी तथा प्रकाश एवं कैमरा मनोज स्वामी एवं संगीत सागर गढवाल ने किया। मंच सज्जा अंकित शर्मा नोनू एवं जीवितेश शर्मा की रही।

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