जयपुर। प्रदेश में अपराध और माफिया तंत्र के खिलाफ चल रही कार्रवाई अब केवल गिरफ्तारी और जेल तक सीमित नहीं रहेगी। राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत राजस्थान पुलिस ने अपराधियों की आर्थिक ताकत तोड़ने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 107 के तहत अब अपराध से अर्जित अवैध संपत्तियों को चिन्हित कर उन्हें जब्त करने और ध्वस्त करने की कार्रवाई तेज कर दी गई है।
पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने बताया कि प्रदेशभर में 636 हार्डकोर अपराधियों की पहचान कर उनकी आपराधिक गतिविधियों से अर्जित 220 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध संपत्तियों को चिन्हित किया गया है। इन संपत्तियों के खिलाफ न्यायालयों में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
उन्होंने बताया कि अब तक 584 प्रकरणों में विभिन्न न्यायालयों में इस्तगासे (प्रार्थना पत्र) पेश किए गए हैं। इनमें से 182 मामलों में न्यायालयों ने नोटिस जारी कर दिए हैं। पुलिस को इस अभियान में शुरुआती स्तर पर महत्वपूर्ण सफलता भी मिली है।
राजस्थान पुलिस ने अब तक 13 मामलों में करीब 32 करोड़ रुपए मूल्य की अवैध रूप से अर्जित संपत्तियां न्यायालय के आदेश से जब्त की हैं। इनमें बूंदी जिले ने एक ही प्रकरण में लगभग 12 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त कर सबसे बड़ी कार्रवाई की है।
डीजीपी शर्मा ने बताया कि अपराधियों के मनोबल को तोड़ने के लिए अवैध निर्माणों और संपत्तियों को ध्वस्त करने की कार्रवाई भी की जा रही है। वर्ष 2026 में 1 जनवरी से 28 मई तक प्रदेशभर में 39 ध्वस्तीकरण अभियान चलाए गए, जिनमें अनुमानित 35 करोड़ 10 लाख 81 हजार रुपए मूल्य की अवैध संपत्तियां ध्वस्त की गईं।
झालावाड़ जिला इस मामले में सबसे आगे रहा, जहां 12 कार्रवाइयों के दौरान करीब 22 करोड़ 90 लाख रुपए की अवैध संपत्तियों को ध्वस्त किया गया। राज्य को नशा मुक्त बनाने के उद्देश्य से गठित एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) भी मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ आर्थिक कार्रवाई कर रही है। एनडीपीएस एक्ट की धारा 68-एफ के तहत जनवरी 2026 से अप्रैल 2026 के बीच 36 तस्करों के खिलाफ इस्तगासे पेश किए गए।
इनमें से 28 मादक पदार्थ तस्करों के विरुद्ध अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की सीजिंग और फ्रीजिंग के प्रस्ताव स्वीकृत किए गए। इन मामलों में करीब 33 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्तियां सीज और फ्रीज की गई हैं।
डीजीपी ने बताया कि जुलाई 2024 से लागू भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 107 इस पूरी कार्रवाई का कानूनी आधार है। इसका उद्देश्य केवल अपराधियों को जेल भेजना नहीं, बल्कि उनकी आर्थिक शक्ति समाप्त करना भी है।
उन्होंने कहा कि नए कानून के तहत जब्त की गई संपत्तियों का लाभ पीड़ितों को भी मिल सकेगा। प्रावधानों के अनुसार जिला कलक्टर के माध्यम से जब्त संपत्तियों में से पीड़ितों को उनकी संपत्ति वापस लौटाई जा सकेगी। इससे माफियाओं और अपराधियों के शोषण का शिकार हुए लोगों को राहत मिलेगी।
पुलिस मुख्यालय ने इस संबंध में सभी जिलों को विस्तृत एसओपी जारी की है ताकि अपराधियों की अवैध संपत्तियों के खिलाफ प्रभावी और एकरूप कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।



















