जयपुर। तूंगा थाना पुलिस ने चोरी और नकबजनी की वारदातों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय मोगियां गैंग का पर्दाफाश करते हुए गैंग के चार शातिर नकबजनों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने राजस्थान और मध्यप्रदेश के विभिन्न इलाकों में 84 से अधिक चोरी और नकबजनी की वारदातों को अंजाम देना स्वीकार किया है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल मोटरसाइकिल, तार काटने का कटर, नकब, पेचकश, सरिया सहित चोरी का माल बरामद किया है। पुलिस उपायुक्त जयपुर पूर्व रंजीता शर्मा ने बताया कि तूंगा थाना पुलिस ने रिंकू मोग्या (21) निवासी चौथ का बरवाड़ा जिला सवाई माधोपुर, राजू मोग्या (29) निवासी बरगमा जिला श्योपुर मध्यप्रदेश, धनराज मोग्या (18) निवासी बरोनी जिला टोंक और मोहन उर्फ मुन्ना मोग्या (21) निवासी लाखेरी जिला बूंदी को सवाई माधोपुर में दबिश देकर गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार राजू, मोहन और रिंकू का पूर्व में भी चोरी और नकबजनी का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है।
पूछताछ में आरोपियों ने अपने अन्य साथियों सुरेश, कैलाश और जीतराम आदि के साथ मिलकर जयपुर, सवाई माधोपुर, बूंदी, टोंक, बारां, जयपुर ग्रामीण, श्योपुर और कोटा ग्रामीण क्षेत्र में 84 से अधिक वारदातें करना स्वीकार किया है। पुलिस अब इन वारदातों का सत्यापन करने के साथ ही गैंग के अन्य सदस्यों की भूमिका और चोरी के माल की बरामदगी को लेकर जांच कर रही है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल मोटरसाइकिल, तार काटने की कटर मशीन, नकब, पेचकश, सरिया और चोरी का माल-मशरूका बरामद किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ जारी है और पूछताछ में चोरी की अन्य घटनाओं के खुलासे की संभावना है।
तूंगा थानाधिकारी सज्जन सिंह ने बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने तूंगा के अलावा जयपुर के कोटखावदा और दौसा के लवाण क्षेत्र में भी कई वारदातें करना स्वीकार किया। पुलिस अब आरोपियों से अन्य घटनाओं के संबंध में पूछताछ कर रही है।
पुलिस पूछताछ में गैंग के वारदात करने का तरीका भी सामने आया है। आरोपी बाइक या चौपहिया वाहन से सुनसान स्थान तक पहुंचते थे और वाहन को कुछ दूरी पर खड़ा कर देते थे। इसके बाद पैदल खेतों की तारबंदी को कटर से काटकर एकांत में बने मकानों या ढाणियों तक पहुंचते थे।
गैंग के दो-तीन सदस्य मकान के पीछे की दीवार, सीमेंट की जाली, लोहे की ग्रिल या खिड़की को तोड़कर अंदर प्रवेश करते थे। इसके बाद अलमारी और बक्सों के ताले तोड़कर नकदी व जेवरात पर हाथ साफ करते थे। वहीं गैंग के तीन-चार सदस्य बाहर रहकर निगरानी करते थे।


















