जयपुर। छोटीकाशी जयपुर में भाद्रपद शुक्ल पक्ष एकादशी, 22 सितंबर को जलझूलनी एकादशी का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर शहर के प्रमुख मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजनों की धूम रहेगी। बारिश के कारण लबालब भरे जलाशयों के भाव से मंदिरों में ठाकुरजी को नौका में विराजमान कर नौका विहार कराया जाएगा। पर्व का मुख्य आयोजन ठिकाना मंदिर श्री गोविंददेवजी में संपन्न होगा। हालांकि, यहां नौका विहार का आयोजन नहीं होगा, लेकिन प्रभु के लिए विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे। इस दिन ठाकुर श्रीजी को अलौकिक ‘नटवर वेश’ और विशेष श्रृंगार धारण कराया जाएगा।
तुलसी मंच पर होगा पंचामृत अभिषेक
उत्सव के तहत ग्वाल झांकी के उपरांत शाम 4:45 बजे से 5:15 बजे तक जलझूलनी एकादशी पूजन का विधान रहेगा। इस दौरान दर्शन पट मंगल रहेंगे। महंत अंजन कुमार गोस्वामी द्वारा पूजन संपन्न कराया जाएगा। पूजन प्रक्रिया के तहत ठाकुर श्री सालिग्राम जी को खाट पर विराजमान कर मंदिर के दक्षिण-पश्चिमी चौक स्थित तुलसी मंच पर लाया जाएगा। यहां उनका पंचामृत से अभिषेक, चंदन श्रृंगार और आरती की जाएगी।
अभिषेक और आरती के पश्चात तुलसी मंच की चार परिक्रमा की जाएगी। इसके बाद ठाकुर श्री सालिग्राम जी को पुनः खाट पर विराजमान करवाकर मंदिर परिसर की एक परिक्रमा कराई जाएगी और फिर निज मंदिर में प्रवेश कराया जाएगा, जहां उन्हें ठाकुर श्री गोविंददेवजी के समीप विराजमान किया जाएगा। इस अनुष्ठान के बाद श्रद्धालु संध्या झांकी में प्रभु के दर्शन कर सकेंगे। गौरतलब है कि जलझूलनी एकादशी के अवसर पर विभिन्न वैष्णव परंपराओं के अनुसार भगवान के श्री विग्रह को जल के समीप ले जाकर पूजन और नौका विहार कराने की प्राचीन परंपरा रही है।



















