जयपुर। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया और चतुर्थी तिथि के पावन अवसर पर सोमवार को कजली तीज और संकष्टी चतुर्थी का व्रत श्रद्धा और उल्लास के साथ रखा जा रहा है। दोनों व्रतों में शाम के समय विशेष पूजा-अर्चना के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है। शहर में महिलाओं ने सुबह से ही व्रत रखकर पूजा की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
कजली तीज पर सुहागिन महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती और नीमड़ी माता की पूजा-अर्चना करेंगी। इस अवसर पर जौ, गेहूं, चना या चावल को सेंककर और पीसकर सत्तू तैयार किया जाता है। सत्तू का भोग माता पार्वती और नीमड़ी माता को अर्पित किया जाएगा। महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखेंगी और रात्रि में चंद्रमा के दर्शन कर उन्हें अर्घ्य देने के बाद सत्तू ग्रहण कर व्रत खोलेंगी। महिलाएं पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करेंगी।
पंडित राजेश कुमार शर्मा (वीर तेजाजी धाम) ने बताया कि संकष्टी चतुर्थी के अवसर पर महिलाएं शाम को चौथ माता और भगवान गणेश की पूजा करेंगी। भगवान गणेश को दूर्वा, लाल फूल और मोदक का भोग लगाया जाएगा। पूजा के बाद व्रत कथा सुनी जाएगी।
रात्रि में चंद्रमा के दर्शन कर उन्हें अर्घ्य देने के बाद महिलाएं व्रत खोलेंगी। इस दौरान पति की दीर्घायु, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की समृद्धि की कामना की जाएगी।
पूजा का शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय
पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:10 बजे से रात 8:10 बजे तक,चंद्रोदय एवं चंद्र दर्शन: रात 8:32 बजे
कजली तीज और संकष्टी चतुर्थी के एक साथ आने से शहर के मंदिरों और घरों में दिनभर धार्मिक माहौल बना रहेगा। शाम के समय महिलाएं विधि-विधान से पूजा कर चंद्रमा को अर्घ्य देंगी।



















