चेहल्लुम पर शोहदा-ए-कर्बला को अकीदत से किया याद

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Martyrs of Karbala remembered with reverence on Chehlum.
Martyrs of Karbala remembered with reverence on Chehlum.

जयपुर। शोहदा-ए-कर्बला की याद में मंगलवार को चेहल्लुम (20 सफर) राजधानी में पूरी अकीदत, अदब और एहतराम के साथ मनाया गया। शहरभर की शिया अंजुमनों की ओर से मातमी जुलूस निकाले गए और कई स्थानों पर जंजीरी मातम कर हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) एवं कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की गई। धार्मिक आयोजनों के दौरान अमन, भाईचारे और इंसानियत की दुआएं मांगी गईं।

राजधानी के विभिन्न इमामबाड़ों, कर्बला शरीफ और मोहल्लों में मजलिस-ए-अजा का आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने कर्बला शरीफ पहुंचकर फातिहा पढ़ी और शोहदा-ए-कर्बला की कुर्बानियों को याद किया। इस अवसर पर विभिन्न स्थानों पर हुसैनी लंगर का भी आयोजन किया गया, जिसमें सभी वर्गों के लोगों ने सहभागिता निभाई।

चेहल्लुम के मौके पर धार्मिक आयोजनों के साथ सामाजिक सरोकारों को भी प्राथमिकता दी गई। जरूरतमंद परिवारों की सहायता, यतीम बच्चों के सहयोग, अस्पतालों में मरीजों को फल वितरण तथा पड़ोसियों और जरूरतमंदों की मदद जैसे सेवा कार्य किए गए।

धर्मगुरुओं ने मजलिसों को संबोधित करते हुए कहा कि हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) का जीवन सत्य, न्याय, मानवता और हक की रक्षा के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि कर्बला का संदेश किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है। चेहल्लुम अन्याय, अत्याचार, अहंकार, नफरत और हिंसा के विरुद्ध शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से खड़े होने तथा प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने की सीख देता है।

दिनभर चले धार्मिक कार्यक्रमों में अकीदतमंदों ने शोहदा-ए-कर्बला के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। आयोजनों का समापन समाज में शांति, सौहार्द और मानव सेवा का संदेश देने के साथ हुआ।

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