गोबर-मिट्टी और औषधीय बीजों से बने ‘औषधीय धन्वंतरि गणपति’

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‘Medicinal Dhanvantari Ganpati’ made from cow dung, soil, and medicinal seeds.
‘Medicinal Dhanvantari Ganpati’ made from cow dung, soil, and medicinal seeds.

जयपुर। टोंक रोड, सांगानेर स्थित श्री पिंजरापोल गौशाला के वैदिक औषधीय पादप केंद्र में गणपति स्थापना महोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। यहां गाय के पवित्र गोबर, प्राकृतिक मिट्टी और औषधीय पौधों के बीजों से निर्मित अनूठे ‘औषधीय धन्वंतरि गणपति’ की विधि-विधान से स्थापना की गई। प्रतिमा का निर्माण स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने किया।

प्रतिमा में श्याम तुलसी, राम तुलसी, वन तुलसी और कपूर तुलसी सहित तुलसी की पांच किस्मों के बीज, शतावरी, पीकेएम प्रजाति के मोरिंगा और नागौरी अश्वगंधा के बीज समाहित किए गए हैं। प्रतिमा का विसर्जन जलाशय में नहीं किया जाएगा, बल्कि मिट्टी में किया जाएगा, ताकि औषधीय बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप ले सकें।

अखिल भारतीय गौशाला सहयोग परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयोजक डॉ. अतुल गुप्ता के नेतृत्व में गणपति और काल भैरव की पूजा-अर्चना व महाआरती हुई। डॉ. गुप्ता ने कहा कि यह प्रतिमा सनातन संस्कृति, आयुर्वेद और पर्यावरण संरक्षण का संगम है। भगवान धन्वंतरि आरोग्य और आयुर्वेद के प्रतीक हैं, इसलिए इसे औषधीय धन्वंतरि गणपति स्वरूप दिया गया है।

हैनीमैन एनिमल चैरिटेबल मिशन सोसाइटी की सचिव एवं परिषद की सह-संयोजक मोनिका गुप्ता के सान्निध्य में महिलाओं ने प्रतिमा निर्माण से स्थापना तक सहभागिता निभाई। उन्होंने कहा कि गोबर और मिट्टी से पर्यावरण-अनुकूल प्रतिमाओं का निर्माण महिलाओं के लिए स्वरोजगार का माध्यम बन सकता है और गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा।

इस अवसर पर गौमाता की विशेष पूजा और सेवा भी की गई। गेहूं व पौष्टिक मिलेट्स की रोटियां, हरी मूंग की दाल और हरे चारे से युक्त भोजन-प्रसादी गौमाताओं को कराई गई। आयोजन में गौसंरक्षण, औषधीय पौधों के संवर्धन, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तीकरण और गौशाला आत्मनिर्भरता का संदेश दिया गया। महाआरती और प्रसाद वितरण के साथ महोत्सव का समापन हुआ।

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