पुलिस लाइन में हुआ मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता एवं प्रशिक्षण सत्र

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जयपुर। राज्य सरकार के ‘मन दर्पण-2’ अभियान के तहत जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम, जयपुर के सहयोग से पुलिस लाइन में पुलिस अधिकारियों एवं कार्मिकों के लिए मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता एवं प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य तनाव और मानसिक संकट के शुरुआती संकेतों की पहचान, समय पर सहायता तथा उचित रेफरल की जानकारी देना रहा।

पुलिस आयुक्त सचिन मित्तल ने कहा कि पुलिस की चुनौतीपूर्ण कार्यप्रकृति और लगातार आपात परिस्थितियों के बीच मानसिक स्वास्थ्य व तनाव प्रबंधन पर ध्यान देना जरूरी है। उप पुलिस आयुक्त मुख्यालय अनुष्ठा कालिया ने तनाव के शुरुआती संकेत पहचानकर समय पर सकारात्मक प्रबंधन और जरूरत पड़ने पर सहायता लेने पर जोर दिया।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लाइन अशोक चौहान ने लंबे कार्य घंटों और लगातार जिम्मेदारियों के बीच तनाव के संकेतों को समय पर पहचानने को महत्वपूर्ण बताया। चिकित्सा अधिकारी डॉ. गिरिराज शर्मा ने मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य के संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लगातार तनाव का असर नींद, व्यवहार और कार्यक्षमता पर पड़ सकता है।

जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. गजानंद वर्मा ने मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और मानसिक संकट के शुरुआती संकेतों की जानकारी दी। प्रशिक्षण में ‘युवा मन’, गेटकीपर प्रशिक्षण और कार्यस्थल तनाव प्रबंधन विषयों पर संवादात्मक चर्चा हुई। गेटकीपर प्रशिक्षण में संकटग्रस्त व्यक्ति के संकेत पहचानने, संवेदनशीलता से बातचीत करने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ सहायता से जोड़ने का प्रशिक्षण दिया गया।

कार्मिकों को टेली-मानस 14416 के माध्यम से उपलब्ध मानसिक स्वास्थ्य सहायता एवं परामर्श सेवाओं की जानकारी भी दी गई। कार्यक्रम में अधिकारियों और कार्मिकों ने प्रश्नोत्तर में सक्रिय भागीदारी की तथा मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील रहने और जरूरतमंद व्यक्ति को उचित सहायता से जोड़ने की शपथ ली। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पुलिस कार्मिकों में ‘पहचान–बातचीत–सहायता–रेफरल’ की प्रक्रिया को मजबूत करना रहा।

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