वाइल्डलाइफ पर्यटन और संरक्षण में संतुलन की जरूरत: डॉ. लतीका नाथ

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Need for a balance between wildlife tourism and conservation: Dr. Latika Nath
Need for a balance between wildlife tourism and conservation: Dr. Latika Nath

जयपुर। बाघ संरक्षण और संवर्धन के समाधान खोजने व इसे प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित 5वें रॉयल रणथंभौर इंटरनेशनल टाइगर वीक (आईटीडब्ल्यू) का शुक्रवार को आगाज हुआ। लिव4फ्रीडम एलएलपी द्वारा रणथंभौर के आमाघाटी वाइल्डलाइफ रिज़ॉर्ट और कैसल झूमर बावड़ी में सर्वश्रेष्ठ बाघों का संरक्षण (कंजर्व इंडियाज़ फाइनेस्ट टाइगर्स) थीम के अंतर्गत आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम में पहले दिन विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया।

सुबह झूमर बावड़ी में स्कूली बच्चों ने पेंटिंग्स में वाइल्ड लाइफ व टाइगर कंजर्वेशन के संदेश को साकार किया। शाम को आमाघाटी वाइल्डलाइफ रिज़ॉर्ट में विभिन्न चर्चा सत्र हुए जिनकी शुरुआत दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश धर्मेश शर्मा के स्वागत उद्बोधन के साथ हुई। ‘भारत के बाघों का भविष्य: संकट, रिकवरी और लंबे समय तक अस्तित्व’ विषय पर कंजर्वेशन ईकोलॉजिस्ट, लेखिका और फोटोग्राफर डॉ. लतिका नाथ ने विचार रखे।

वहीं ‘इंसानों के वर्चस्व वाले इलाके में बाघ’ विषय पर वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष व सीईओ डॉ. अनिश अंधेरिया ने चर्चा की। अंतारा चटर्जी के साथ चर्चा के दौरान उपरोक्त दोनों स्पीकर्स ने वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. लतिका नाथ ने कहा कि कंजर्वेशन और वाइल्ड लाइफ ट्यूरिज्म की बात की जाती रही है लेकिन इन प्रोजेक्ट्स की मॉनिटरिंग करना बेहद जरूरी है, इस मामले में हमें नेपाल, भूटान, अफ्रीकी महाद्वीप के देशों और दक्षिणी अमरीका से सीखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वाइल्ड लाइफ सफारी में पर्यटकों की संख्या सीमित रखी जानी चाहिए, पर्यटन से जो कमाई हो रहे है उसमें से संरक्षण पर भी खर्च किया जाना चाहिए यह संतुलन बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि बाघ पर्यावरण के साथ—साथ इंसानों का भी दोस्त होता है। उन्होंने नियोजित विकास पर जोर देते हुए कहा कि नुकसान के बाद कदम उठाने से कोई फायदा नहीं है।

डॉ. अनिश अंधेरिया ने कहा कि ईकोनॉमी के लिए एनवायरनमेंट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि आधुनिक विकास की संरचनाएं (ब्रिज, हाईवे, रेलवे लाइन) से जानवरों का जीवन प्रभावित होता है। उन्होंने रेलवे लाइन्स पर सायरन लगाने व वन्यजीवों को दुर्घटनाओं से बचाने के तरीके बताए। उन्होंने यह भी कहा कि टाइगर से देश की हाइड्रोलॉजी भी बचेगी।

वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट और सफारी गाइड विजय सिंह मीणा ने बाघों से जुड़े रोमांचक किस्सों को साझा किया। इस दौरान भारत के ख्यात बाघों ‘डॉलर’, ‘चार्जर’, ‘पारो’, ‘कॉलरवाली’, ‘मछली’, ‘माया’ के जीवन यात्रा पर भी प्रकाश डाला गया। वाइल्ड लाइफ फिल्म मेकर सुबैया नल्ला मुत्थु ने डॉक्यूमेंट्री के जरिए ‘मछली’ के जीवन को दर्शाया। रे​डिको खेतान के अमित छौजर और वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट अभिषेक भाट ने भी बाघों के जीवन पर अपने विचार रखे। ऑडियो—विजुअल प्रेजेंटेशन रॉयल रणथंभौर— कंजर्व इंडियाज फाइनेस्ट टाइगर भी पेश की गयी।

शनिवार को होंगी निम्न गतिविधियां

लिव4फ्रीडम के पार्टनर आनंद भारद्वाज और सुनील मंगल ने बताया कि यह इवेंट संरक्षण, सरकार, पर्यटन, बिज़नेस और सिविल सोसाइटी के लीडर्स को एक साथ लाता है। दूसरे दिन शनिवार को एक्टर, स्क्रीनराइटर और प्रोड्यूसर राहुल सिंह बाघ संरक्षण में सिनेमा के योगदान पर प्रकाश डालेंगे। वाइल्डलाइफ एसओएस के कोफाउंडर और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण बाघ संरक्षण के उपायों पर चर्चा करेंगे। ‘ज़िम्मेदार सफ़ारी: अधिकार, नियम और सम्मान’ विषय पर आउटलुक ट्रैवलर की डिजिटल एडिटर अंतारा चटर्जी, इंडिट असोसिएट्स के पार्टनर अभिषेक कुमार, क्लाइमेट बॉन्ड्स की साउथ एशिया हेड नेहा कुमार और मंडावा ग्रुप ऑफ होटल्स के डायरेक्टर कुंवर अंगद देव विचार रखंगे।

कार्यक्रम में आयोजित होने वाला कंजर्वेशन अवॉर्ड्स समारोह भी प्रमुख आकर्षण रहेगा, जिसमें वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय सरोकारों को मजबूत करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मानित किया जाएगा। सभी पुरस्कारों का चयन एक प्रतिष्ठित जूरी द्वारा किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता वी. पी. सिंह बदनौर, पंजाब के पूर्व राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के पूर्व प्रशासक करेंगे।

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