जयपुर। भाद्रपद कृष्ण नवमी शनिवार को गोगानवमी के रूप में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। लोकदेवता जाहरवीर गोगाजी महाराज की पूजा-अर्चना कर पुए-पकोड़ी और खीर का भोग लगाया गया। श्रद्धालुओं ने रक्षाबंधन पर बांधी गई राखियां भी गोगाजी को अर्पित कीं। कई स्थानों पर मिट्टी से बनाई गई गोगाजी की प्रतिमाओं का पूजन किया गया।
नरेडा, नाड़ी का फाटक और विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र सहित शहर के विभिन्न स्थानों पर स्थित गोगाजी मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना हुई। श्रद्धालुओं ने गोगाजी महाराज की धोक लगाकर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और सुरक्षा की कामना की। कई स्थानों पर भजन-कीर्तन, प्रसाद वितरण और महाजोत के आयोजन भी हुए।
ददरेवा में हुआ था जन्म
लोकमान्यता के अनुसार गोगाजी महाराज का जन्म चूरू जिले के ददरेवा में चौहान शासक जेवर सिंह और माता बाछल देवी के घर भाद्रपद कृष्ण नवमी को हुआ था। गुरु गोरखनाथ के आशीर्वाद से जन्मे गोगाजी आगे चलकर जाहरवीर गोगाजी के नाम से लोकदेवता के रूप में पूजे गए। उन्हें गोगापीर और नागों के देवता के रूप में भी श्रद्धा से याद किया जाता है।
मान्यता है कि गोगाजी ने मातृभूमि और गायों की रक्षा के लिए गजनवी की सेना से युद्ध किया था। उनकी वीरता और लोककल्याण से जुड़ी कथाएं आज भी राजस्थान में प्रचलित हैं। खेजड़ी के नीचे बने गोगाजी के थान से लेकर शहरों की गोगामेड़ियों तक उनकी पूजा की परंपरा कायम है।
हनुमानगढ़ जिले के गोगामेड़ी स्थित प्रमुख गोगाजी मंदिर में भी गोगानवमी पर मुख्य मेला भरता है। यह स्थल हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।



















