जयपुर। श्री राधा गिरधर लाल जी के श्रीवृंदावन में विवाह संपन्न होने के बाद जयपुर आगमन पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। श्री शुक संप्रदाय पीठाधीश्वर अलबेली माधुरी शरण महाराज के सानिध्य में जलेब चौक से गाजे-बाजे और शाही लवाजमे के साथ शोभायात्रा रवाना हुई।
प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ठाकुर जी के स्वरूप को गोद में लेकर रथ पर विराजमान रहे। अन्य रथों में काले हनुमानजी मंदिर के महंत गोपालदास महाराज सहित संत-महंत शामिल हुए। शोभायात्रा चांदी की टकसाल और सुभाष चौक होते हुए पानो का दरीबा स्थित श्री सरस निकुंज पहुंची। रास्तेभर श्रद्धालु ‘राधे-राधे’ और हरिनाम संकीर्तन पर झूमते नजर आए।
श्री सरस निकुंज में ठाकुर जी का ‘जवाई पावने’ के रूप में भावभीना स्वागत किया गया। अलबेली माधुरी शरण महाराज और इंद्रेश उपाध्याय ने ‘समधी’ भाव से एक-दूसरे का आदर-सत्कार किया। सरस भजनों के गायन के बाद महाआरती हुई। मंदिर प्रवक्ता प्रवीण बड़े भैया ने बताया कि मान्यता के अनुसार जयपुर से किशोरी जी की चुनरी वृंदावन गई थी और विवाह के बाद ठाकुर जी ‘जवाई पावने’ के रूप में जयपुर पधारे हैं।



















