मौनी अमावस्या पर मंदिरों में सजी विशेष झांकी: अनेक शुभ योग में श्रद्धालुओं ने किया तीर्थ स्नान

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Special tableaux decorated in temples on Mauni Amavasya ​
Special tableaux decorated in temples on Mauni Amavasya ​

जयपुर। माघ मास की मौनी अमावस्या पर अनेक शुभ योग में श्रद्धालुओं ने तीर्थ स्थान पर स्नान कर अपने पितरों के निमित्त तर्पण किया। शुक्रवार को सुबह 8 बजकर 3 मिनट पर मौनी अमावस्या प्रारंभ हुई ,जिसका समापन शनिवार सुबह 4 बजकर 29 मिनट पर हुआ। इस अवसर पर आराध्य देव गोविंद देवजी मंदिर में ठाकुरजी को कृष्ण रंग की पोशाक धारण कराई गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचे। मौनी अमावस्या पर दिनभर गौशालाओं में दान-पुण्य का सिलसिला चलता रहा ।

मौनी अमावस्या पर रहा चतुग्रही योग
मौनी अमावस्या तिथि पर सर्वार्थ सिद्धि योग सूर्य ,चंद्र ,मंगल ,बुध ,मकर राशि में होने से चतुग्रही योग का संयोग रहा। इस तिथि पर बड़ी संख्या में भक्तों ने दिन भर मौन धारण करते हुए मुनियों सा आचरण किया। ऐसी मान्यता कहै कि मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए मौनी अमावस्या दिन सबसे शुभ माने जाने की मान्यता के कारण शुक्रवार को तर्पण और हवन किया गया।


ऐसा माना जाता है कि मौनी अमावस्या के दिन गंगा का जल अमृतमय हो जाता है। गंगा स्नान से अमृत की प्राप्ति होती है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मौनी अमावस्या पर गलता जी जाकर गालव गंगा के जल से स्नान किया। वहीं कई लोगों ने घर पर गंगा जल मिले जल से स्नान किया। अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने पक्षियों खासकर कौओं को तेल में तले पकवान खिलाए। आटे की गोलियां बनाकर मछलियों को खिलाई। पीपल के पेड़ की पूजा कर परिक्रमा की। पीपल के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास होता है। महिलाओं ने पीपल के पेड़ पर 108 बार कच्चा सूत लपेटकर परिक्रमा की। गरीब, साधु, महात्माओं, ब्राह्मणों को भोजन कराकर कंबल, ऊन के कपड़े दान किए।


गोशालाओं में किया दान-पुण्य:

म्हारे घरां पधारो श्याम संस्था की ओर से शुक्रवार को मौनी अमावस्या पर गौ भक्तों ने किया दान पुन म्हारे घरा पधारो श्याम संस्था द्वारा श्याम पार्क में सभी भक्तों ने बढ़ चढक़र गौ माता के लिए सामान एकत्र किया। मानसरोवर के श्याम पार्क में एकत्र किया गया सामान प्रकाश दास महाराज की गौशाला पहुंचाया गया। अध्यक्ष रतन कट्टा ने बताया कि सभी गोवंश के लिए सब्जियां, हरा चारा, गुड़ सहित अन्य खाद्य पदार्थ एकत्र किए गए।

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