स्वामी अमित देव के सान्निध्य में स्यात योग सम्मेलन में योग और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

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Syat Yoga Conference in the presence of Swami Amit Dev
Syat Yoga Conference in the presence of Swami Amit Dev

जयपुर। श्री योग अभ्यास आश्रम ट्रस्ट (स्यात) द्वारा और ‘अलमाइटी इंटरनेशनल एस्ट्रोलॉजी कॉन्क्लेव’ की सहभागिता से तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित स्यात योग सम्मेलन उत्साह, ऊर्जा और आध्यात्मिकता के अद्भुत संगम के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। स्वामी अमित देव के सान्निध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 2500 से अधिक लोग उपस्थिति रहे।

जिसने इस सम्मेलन को एक बड़े जनआंदोलन का रूप दिया। एमआरवी समूह के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में का मुख्य विषय “अपनी ऊर्जा को संतुलित करें, अपने जीवन को रूपांतरित करें” रहा, जिसने योग के व्यापक स्वरूप को सामने रखा। इस अवसर पर स्वामी अमित देव ने कहा, “योग मतलब जोड़ना है, और यही इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हैकृयोग, आयुर्वेद, वास्तु और ज्योतिष का संगम।” उनके इस संदेश ने सम्मेलन की मूल भावना को स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त किया।

कार्यक्रम में ओ. पी. बब्बर, प्रो. ए. बी. शुक्ला, पुरुषोत्तम गौर ढाका, राम जी, अखिल, अनूपम जॉली और हीरा योगी सहित कई गणमान्य व्यक्तित्वों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. विनोद कुमार द्वारा मंत्रमुग्ध करने वाली बाँसुरी वादन से हुआ। डॉ मेघा शर्मा की पहल ‘अलमाइटी इंटरनेशनल एस्ट्रोलॉजी कॉन्क्लेव’ द्वारा कार्यक्रम में जोइटस वास्तु और स्कैनिंग जैसी विधाओं के दिग्गज पंडित सतीश शर्मा, डॉ वाय राखी, इला गोस्वामी सहित कई हस्तियों ने अपने विचार साझा किये।

सम्मेलन के प्रमुख आकर्षणों में विश्व प्रसिद्ध जादूगर सम्राट शंकर की प्रस्तुति रही, जिन्होंने अपनी अनोखी जादुई कला और दर्शकों के साथ संवाद के माध्यम से पूरे सभागार को रोमांचित कर दिया। उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में मनोरंजन का एक अलग आयाम जोड़ दिया।

जिसके बाद विभिन्न सत्रों में उपस्थित जनसमूह को न केवल प्रेरित किया, बल्कि जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन के लिए जागरूक भी किया। सम्मेलन में योग और ध्यान सत्र, आध्यात्मिक प्रवचन तथा ज्योतिष, अंक विद्या और समग्र उपचार पर आधारित इंटरैक्टिव सत्रों का आयोजन किया गया।

यह आयोजन पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों और आधुनिक वेलनेस अप्रोच के बीच एक प्रभावी सेतु बनकर उभरा, जिसने आध्यात्मिक संवाद और ज्ञान-विनिमय के लिए एक व्यापक मंच प्रदान किया। इसके साथ ही स्यात द्वारा प्रस्तुत योग प्रदर्शन ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया, जिसमें षटकर्म क्रिया के पांच अंगों का जीवंत प्रदर्शन किया गया। इस प्रस्तुति ने प्राचीन योग परंपरा की गहराई और वैज्ञानिकता को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा।

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