फर्जी निवेश पोर्टल से देशभर में करोड़ों की ठगी करने वाले दो डायरेक्टर गिरफ्तार

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Two directors arrested for swindling crores of rupees across the country via a fake investment portal.
Two directors arrested for swindling crores of rupees across the country via a fake investment portal.

जयपुर। राजस्थान पुलिस की स्टेट साइबर क्राइम थाना पुलिस ने व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग एवं आईपीओ निवेश का झांसा देकर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह ने देशभर में 50 से 60 करोड़ रुपये तक की साइबर ठगी को अंजाम दिया है।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (साइबर क्राइम) विजय कुमार सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान देवेन्द्र शर्मा और निखिल लुथरा निवासी नजफगढ़ (दिल्ली) के रूप में हुई है। दोनों टेरापल्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर हैं। इन्हें हरियाणा के फरीदाबाद से गिरफ्तार किया गया।

इस मामले का खुलासा जयपुर निवासी डॉ. निखिल मेहता की शिकायत से हुआ। उन्होंने 23 जनवरी 2025 को स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार गूगल और सोशल मीडिया के माध्यम से ‘विकासा कैपिटल’ नामक निवेश पोर्टल पर आईपीओ तथा भारतीय और अमेरिकी शेयर बाजार में निवेश पर आकर्षक एवं सुनिश्चित लाभ का लालच दिया गया।

इसके बाद आरोपियों ने व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए फर्जी लिंक भेजकर मोबाइल में नकली एप्लीकेशन इंस्टॉल करवाई। एप में निवेश पर लगातार काल्पनिक लाभ दिखाकर भरोसा जीत लिया गया। शुरुआत में कम राशि निवेश करवाकर थोड़ी रकम वापस भी दिलाई गई, जिससे विश्वास और बढ़ गया।

बाद में ‘सत्कार शॉपिंग आईपीओ’ समेत विभिन्न निवेश योजनाओं के नाम पर अधिक लाभ का झांसा देकर पीजी एंटरप्राइजेज, एसके एंटरप्राइजेज, टेरापल्स प्राइवेट लिमिटेड, राधा माधब वैराइटीज, पर्थ ट्रेडर्स और प्रिशा एंटरप्राइजेज के बैंक खातों में कुल 61.77 लाख रुपये जमा करवा लिए। जब पीड़ित ने राशि निकालने का प्रयास किया तो पोर्टल पर विदेशी नियामक संस्था द्वारा खाता ब्लॉक किए जाने का झूठा संदेश दिखाकर निकासी रोक दी गई और आरोपी संपर्क से गायब हो गए।

पुलिस ने तकनीकी एवं वित्तीय साक्ष्यों, साइबर पुलिस पोर्टल और आईसीजेएस पोर्टल का विश्लेषण कर ठगी में इस्तेमाल बैंक खातों का पता लगाया। जांच में सामने आया कि टेरापल्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से आईडीएफसी बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में चालू खाते खोलकर साइबर ठगी की रकम प्राप्त की जाती थी और तत्काल अन्य खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी।

पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि कंपनी का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त राशि को विभिन्न खातों में स्थानांतरित करने के लिए किया जाता था। अब तक जांच में इनके बैंक खातों से जुड़े करीब 25 करोड़ रुपये के लेनदेन से संबंधित 40 शिकायतें और 10 से अधिक आपराधिक प्रकरण विभिन्न राज्यों में दर्ज होना सामने आया है।

एडीजी विजय कुमार सिंह ने बताया कि लाभान्वित बैंक खातों के विश्लेषण में इस गिरोह के खिलाफ साइबर क्राइम पोर्टल पर 250 से अधिक शिकायतें तथा देश के विभिन्न राज्यों में 50 से अधिक एफआईआर दर्ज मिली हैं। आशंका है कि ठगी की वास्तविक राशि इससे कहीं अधिक हो सकती है। पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।

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