जयपुर। छोटी काशी में आषाढ़ शुक्ल पक्ष की अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी शुक्रवार को अत्यंत श्रद्धा, आस्था और भक्तिभाव के साथ मनाई गई। इस बार विनायक चतुर्थी पर ‘रवि योग’ का विशेष शुभ संयोग होने से पर्व का महत्व और अधिक बढ़ गया। इस अवसर पर शहर के सभी प्रमुख गणेश मंदिरों में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा।
राजधानी के विश्व प्रसिद्ध मोती डूंगरी गणेश मंदिर, गढ़ गणेश, नहर के गणेश जी, सिद्धि विनायक और ध्वजधाीश गणेश मंदिर सहित शहर के तमाम छोटे-बड़े देवालयों में विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की विशेष पूजा-अर्चना और अभिषेक किया गया। भक्तों ने विधि-विधान से पूजन कर विघ्नहर्ता से परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन की सभी विघ्न-बाधाओं के निवारण की कामना की।
विनायक चतुर्थी के अवसर पर श्रद्धालुओं ने धार्मिक मर्यादाओं और परंपराओं का पूर्ण श्रद्धा से पालन किया। मान्यता के अनुसार श्रद्धालुओं ने इस दिन चंद्र दर्शन करने से परहेज किया।शास्त्रों के नियमों के तहत बप्पा की आराधना के दौरान उन्हें तुलसी अर्पित नहीं करने की धार्मिक परंपरा का विशेष ध्यान रखा गया। गणपति अथर्वशीर्ष एवं गणेश स्तोत्र के सस्वर पाठ से मंदिर परिसर गुंजायमान रहे।
वहीं दिनभर चले इस धार्मिक उत्सव में महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने बड़ी संख्या में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। मंदिरों में महाआरती के साथ ही विशेष भजन-कीर्तनों का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालु झूमते नजर आए। पूजा संपन्न होने के बाद भक्तों को मोदक और विशेष प्रसादी का वितरण किया गया।
ऐसी मान्यता है कि विनायक चतुर्थी पर श्रद्धापूर्वक की गई गणेश उपासना से जीवन के सभी कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं तथा साधक को सुख, समृद्धि, बुद्धि और हर कार्य में सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।



















