पट खुले तो मोती डूंगरी गणेश जी और बंद हों तो अष्टविनायक के दर्शन

0
185

जयपुर। मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था और अध्यात्म को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला एक अनूठा कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किए जा रहे चांदी के भव्य दरवाजों पर देशभर के प्रसिद्ध अष्टविनायक गणेश स्वरूपों का अत्यंत आकर्षक एवं कलात्मक अंकन किया गया है। मंगलवार को पहली बार इन अष्टविनायक स्वरूपों के पूर्ण दर्शन श्रद्धालुओं को हुए।

मंदिर महंत पं. कैलाश शर्मा ने बताया कि जब मंदिर के पट खुले रहेंगे तो श्रद्धालु सामान्य रूप से मोतीडूंगरी गणेश जी के दर्शन कर सकेंगे, वहीं पट बंद होने पर इन चांदी के दरवाजों पर अंकित अष्टविनायक स्वरूपों के दर्शन होंगे। वर्तमान में दरवाजों की अंतिम फिनिशिंग का कार्य चल रहा है।

उन्होंने बताया कि गर्भगृह में विशेष तकनीक से ऐसी व्यवस्था की गई है कि रात्रि के समय किसी प्रकार की परछाई सीधे भगवान गणेश के विग्रह पर न पड़े, जिससे दर्शन और अधिक दिव्य एवं मनोहारी बन सकें।

करीब 15 फीट ऊंचे और 12 फीट चौड़े इन चांदी जड़ित दरवाजों का निर्माण लगभग 11 किलो चांदी से किया गया है। दरवाजों पर अष्टविनायक के साथ मूषकराज, ध्वज की मनोहारी आकृतियां, पारंपरिक कलात्मक पेंटिंग और सूक्ष्म नक्काशी श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करती हैं।

इस कलाकृति का निर्माण प्रसिद्ध कलाकार सत्यनारायण कश्यप एवं उनकी टीम ने लगभग तीन माह की मेहनत से किया है। पांच से छह सदस्यों की टीम ने प्रतिदिन पांच से छह घंटे कार्य कर इस शिल्प को अंतिम रूप दिया।

मंदिर परिसर में गर्भगृह सहित छतों एवं अन्य हिस्सों में स्वर्ण वर्क का कार्य भी प्रगति पर है। अब तक गर्भगृह में लगभग एक किलो सोना तथा बाहरी हिस्सों में लगभग सात किलो स्वर्ण वर्क पूरा किया जा चुका है।

मंगलवार को पहली बार अष्टविनायक स्वरूपों के पूर्ण दर्शन हुए। कार्य पूरा होने के बाद शीघ्र ही श्रद्धालुओं के लिए इन चांदी के दरवाजों के दर्शन प्रारंभ कर दिए जाएंगे, जिससे जयपुर में ही अष्टविनायक गणेश के दिव्य दर्शन का अनुपम अनुभव प्राप्त होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here