जयपुर। इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ आर्किटेक्ट्स (आईआईए) द्वारा आयोजित और आर्किटेक्ट तुषार सोगानी द्वारा कन्वेंड 23वें आर्केसिया फोरम का रविवार को जयपुर में समापन हुआ। फोरम में एशिया भर से 2,000 से अधिक आर्किटेक्चरल प्रोफ़ेशनल्स, एजुकेटर्स, स्टूडेंट्स और डिज़ाइन प्रैक्टिशनर्स ने भाग लिया।
23वें आर्केसिया फोरम के तहत आयोजित हैरिटेज वॉक में देश-विदेश से आए आर्किटेक्ट्स ने जयपुर की समृद्ध स्थापत्य विरासत को करीब से जाना। प्रतिभागियों ने ऐतिहासिक इमारतों, हवेलियों और पारंपरिक वास्तुकला की खूबसूरती को देखा। इस दौरान उन्होंने शहर के इतिहास, संस्कृति और विरासत संरक्षण की जरूरतों को भी समझा और अनुभव साझा किए।
इवेंट में 1,500 से अधिक इंडियन डेलीगेट्स और लगभग 600–700 इंटरनेशनल डेलीगेट्स ने शिरकत किया। इस दो दिवसीय कार्यक्रम ने बिल्ट एनवायरनमेंट के भविष्य को लेकर क्रॉस-बॉर्डर डायलॉग, नॉलेज एक्सचेंज और कोलैबोरेशन के लिए एक महत्वपूर्ण प्लेटफार्म तैयार किया।

की-नोट एड्रेसेस, टेक्निकल सेशंस, एक्ज़ीबिशंस, स्टूडेंट इंस्टॉलेशंस, अवॉर्ड्स और कॉम्पीटिशंस के माध्यम से फ़ोरम ने आर्किटेक्चर के तेजी से बदलते लैंडस्केप पर चर्चा की। जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई टेक्नोलॉजीज़ आर्किटेक्चरल प्रैक्टिस को बदल रही हैं, वहीं क्लाईमेट चेंज , कल्चरल आइडेंटिटी और सोशल नीड्स आर्किटेक्चर में कंटेक्स्ट और ह्यूमैनिटी पर नए सिरे से फोकस की मांग कर रहे हैं।
कीनोट सेशन “मोर देन वर्नेक्युलर— आर्किटेक्चरल ह्यूमैनिटी इन द ऐज ऑफ़ एआई” में आर्किटेक्चरल डिज़ाइन पर आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव और इस सवाल पर चर्चा हुई कि प्रोफ़ेशन ऑटोमेशन को अपनाते हुए अपनी ह्यूमन डायमेंशन को किस तरह बनाए रख सकता है।
सिडनी से शांघाई तक के इंटरनेशनल वर्क के उदाहरणों के माध्यम से सेशन में एआई-ड्रिवेन डिज़ाइन, रोबॉटिक फ़ेब्रिकेशन और ह्यूमन-मशीन कोलैबोरेशन को ऐसे टूल्स के रूप में देखा गया, जो आर्किटेक्चर में ह्यूमन वॉइस को रिप्लेस करने के बजाय उसे एक्सटेंड कर सकते हैं।

डिस्कशन में ऐसे भविष्य की कल्पना की गई जहां टेक्नोलॉजी बॉर्डर्स के पार बीलोंगिंग के नए फॉर्म्स तैयार कर सके, साथ ही कल्चरल प्लरालिटी , ह्यूमन कनेक्शन और सेंस ऑफ़ प्लेस को भी बनाए रखे।
टेक्निकल सेशन “हीट, विंड, शेड : डिजाइनिंग बिल्डिंग्स दैट ब्रीथ” में गर्मी, नमी , धूल , बारिश और सीजनल एक्सट्रीम्स के प्रति आर्किटेक्चर की रिस्पॉन्स पर चर्चा की गई। ओरिएंटेशन , शेडिंग , कोर्टयार्ड्स , नेचुरल वेंटिलेशन और पैसिव कूलिंग जैसे ऐप्रोचेस को क्लाइमेट -रेस्पॉन्सिव डिज़ाइन के महत्वपूर्ण टूल्स के रूप में रेखांकित किया गया।
सेशन का एम्फ़ासिस ऐसे बिल्डिंग्स पर रहा जो मशीनज़ पर निर्भर होने से पहले नैचुरली परफ़ॉर्म करें, जिससे क्लाइमेट को आर्किटेक्चरल डिज़ाइन के एक फंडामेंटल ड्राइवर के रूप में स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
फ़ोरम में आर्किटेक्चरल एजुकेशन के भविष्य पर भी चर्चा हुई। “टिचिंग द ग्राउंड : मेकिंग डिज़ाइन एजुकेशन मोर रियल” सेशन ने आर्किटेक्चरल एजुकेशन को मैटेरियल्स , लेबर , क्लाइमेट , कम्युनिटीज़ और कंस्ट्रक्शन की ग्राउंड रियलिटीज़ से अधिक क्लोज़ली कनेक्ट करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
रिसर्च , फ़ील्डवर्क , मैपिंग , प्रोटोटाइपिंग और मेकिंग को ऐसे क्रिटिकल मेथड्स के रूप में हाईलाइट किया गया, जो डिज़ाइन एजुकेशन को केवल इमेज़-ड्रिवेन आउटपुट से आगे ले जाकर आर्किटेक्चर की अधिक ग्राउंडेड अंडरस्टैंडिंग विकसित कर सकते हैं।
फ़ोरम में प्रोफेशनल प्रैक्टिस और आर्किटेक्चरल एजुकेशन में एक्सीलेंस को आर्केशिया अवॉर्ड्स फ़ॉर आर्किटेक्चर, आर्केशिया स्टूडेंट डिज़ाइन कम्पटीशन और आर्केशिया थीसिस ऑफ़ द ईयर के माध्यम से सम्मानित किया गया।
आर्केशिया अवॉर्ड्स ने रेज़िडेंशियल, कमर्शियल, इंस्टिट्यूशनल , सोशल एंड कल्चरल , इंडस्ट्रियल , कांजेर्वेशन , एडेप्टिव रियूज और इंटीग्रेटेड डेवलप्मेंट कैटेगरीज़ में आउटस्टैंडिंग कंप्लीटेड प्रोजेक्ट्स को रिकॉग्नाइज़ किया। इसके साथ सोशली रेस्पोंसिबल आर्किटेक्चर और सस्टेनेबिलिटी के लिए स्पेशल रिकॉग्निशन्स भी दिए गए।
आर्केसिया स्टूडेंट डिज़ाइन कम्पटीशन में इमर्जिंग टैलेंट को गोल्ड, सिल्वर और ब्रोंज अवॉर्ड्स के माध्यम से सम्मानित किया गया। वहीं आर्केसिया थीसिस ऑफ़ द ईयर ने रिसर्च एक्सीलेंस को थीसिस ऑफ़ द ईयर– गोल्ड , हाईएस्ट सोशल रिलीवेंस , हाईएस्ट इनोवेशन एंड ओरिजिनैलिटी और हाईएस्ट वर्ल्ड ओरिएंटेशन जैसी कैटेगरीज़ के माध्यम से सेलिब्रेट किया।
विनिंग और रिकॉग्नाइज्ड प्रोजेक्ट्स को एक्ज़ीबिशंस और डिस्प्लेस के माध्यम से शोकेस किया गया गया जिससे प्रोफेशनल प्रैक्टिस , ऐकडेमिक रिसर्च और इमर्जिंग स्टूडेंट वॉइसेस को एक ही प्लेटफार्म पर लाया गया।
फ़ोरम का समापन इस विचार के साथ हुआ कि आर्किटेक्चर का भविष्य केवल नई टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में नहीं, बल्कि उस ह्यूमन कनेक्शन , कल्चरल आइडेंटिटी , क्लाइमेट रिस्पांसिवनेस और सेंस ऑफ़ प्लेस को बनाए रखने में भी निहित है, जो आर्किटेक्चर को समाज और लोगों के लिए मीनिंगफुल बनाते हैं।



















