गायत्री परिवार ने किया एक वर्षीय राष्ट्रीय शताब्दी संकल्प अभियान का शुभारंभ

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Gayatri Pariwar launched a one-year national centenary resolution campaign.
Gayatri Pariwar launched a one-year national centenary resolution campaign.

जयपुर। माता भगवती देवी शर्मा और अखण्ड दीप के शताब्दी वर्ष पर आयोजित कार्यक्रम के समापन पर गायत्री परिवार ने एक वर्षीय राष्ट्रीय शताब्दी संकल्प अभियान का शुभारंभ किया है। यह अभियान केवल कार्यक्रमों की श्रृंखला नहीं, बल्कि राष्ट्र के सर्वांगीण नव-निर्माण हेतु विचार-मंथन से निकली एक ठोस कार्ययोजना है, जिसका उद्देश्य जन-जन को जागृत कर संस्कारित, स्वावलम्बी और सशक्त भारत का निर्माण करना है।

गायत्री परिवार राजस्थान के समन्वयक गौरीशंकर सैनी ने बताया कि इस राष्ट्रव्यापी अभियान के अंतर्गत संगठन, साधना, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलम्बन, महिला जागृति, युवा चेतना, संस्कार, पर्यावरण एवं ग्रामतीर्थ स्थापना सहित कुल 13 आयामों में स्पष्ट एवं मापनीय लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

इसमें पहले स्थान पर संगठन सुदृढ़ीकरण को रखा गया है। अभियान के अंतर्गत जिला, तहसील- एवं ब्लॉक स्तर पर 3,396 समन्वय समितियों का गठन और पुनर्गठन किया जाएगा। 1,17,095 ग्राम-मोहल्लो में 5 एवं 9 कुंडीय यज्ञ आयोजित होंगे। 17,547 मण्डलों का गठन एवं पंजीयन, 4,760 नवचेतना विस्तार केन्द्रों की स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही 4,409 प्रज्ञापुत्र, 3,966 प्रज्ञापुंज, 1,480 परिव्राजक एवं 4,773 योजनाकार स्तर के कार्यकर्ताओं का शान्तिकुंज को समर्पण सुनिश्चित किया गया है।

देश के 2,18,631 ग्राम, मोहल्लो में गृहे-गृहे गायत्री यज्ञ एवं मण्डल गठन का संकल्प लिया गया है। 22,200 सामूहिक लघु अनुष्ठान, चन्द्रायण साधना की जाएगी। वसन्त पर्व से होलिका दहन तक 18,029 सवालाख गायत्री जप अनुष्ठान, नवरात्रि एवं मंत्रलेखन साधना में 1,54,513 साधकों की सहभागिता तथा शान्तिकुंज साधना प्रशिक्षणों में 25,812 साधकों के प्रशिक्षण का लक्ष्य रखा गया है।

शिक्षा आन्दोलन के अंतर्गत भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में 13,19,445 विद्यार्थियों की भागीदारी का संकल्प लिया गया है। शैक्षणिक संस्थानों में 37,705 ज्ञान दीक्षा, 6,020 संस्कृति मण्डल,13,318 संगोष्ठियां एवं 1,904 शिक्षक गरिमा शिविर आयोजित किए जाएंगे।इसके साथ ही अखण्ड ज्योति, युगनिर्माण योजना एवं प्रज्ञा अभियान पत्रिकाओं के लाखों नए सदस्य जोड़े जाएंगे।

57,567 घरों में वेद एवं सत्साहित्य स्थापना, 3,605 योग शिविर, 3,039 स्वास्थ्य शिविर,1,885 आयुर्वेदिक एवं 1,114 वैकल्पिक चिकित्सा केन्द्र स्थापित किए जाएंगे।508 स्वावलम्बन केन्द्र, 711 स्वावलम्बन शिविर, कृषि, गौ-संरक्षण, फल-सब्जी प्रसंस्करण एवं हस्तकला से जुड़े 770 केन्द्रों का संचालन किया जाएगा।

2,270 नारी सशक्तिकरण सम्मेलन, 1,415 महिला स्वावलम्बन शिविर, प्रज्ञा महिला मंडल का व्यापक गठन, 7,360 देवदम्पति सम्मेलन, 1,888 नवदम्पति शिविर, 7,266 बाल संस्कार शालाएं, 25,343 ‘माँ की संस्कारशाला’, तथा 6,737 कन्या-किशोर कौशल शिविर आयोजित होंगे।

1,27,978 ग्रामों को संस्कारयुक्त, व्यसन मुक्त, स्वावलम्बी बनाने का संकल्प, 2,345 ग्राम तीर्थ यात्राएं, 30,355 वृक्षगंगा एवं पंचवटी रोपण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। युवाओं को जोड़ने हेतु 8,191 युवा संगोष्ठियां, 2,872 युवा चेतना शिविर, 5,243 युवा संगठन एवं 4,070 सुपर-50/100 युवा समूह गठित किए जाएंगे।11,482 व्यसन मुक्ति कार्यक्रम, 6,490 नुक्कड़ सभाएं, 8,959 आदर्श एवं सामूहिक विवाह आयोजित होंगे।

पर्यावरण संरक्षण के अंतर्गत 547 नदियों को गोद लेना, 1,01,332 गंगा सप्तमी स्वच्छता कार्यक्रम, लाखों पौधारोपण एवं उपवन निर्माण का लक्ष्य तय किया गया है।2,956 प्रज्ञा संस्थानों में गतिविधियों का सशक्त संचालन, 1,881 शांतिकुंज पंजीकरण, 2,021 परिव्राजक प्रशिक्षण, तथा 81,692 ज्ञान घट-अन्नघट-ज्ञानरथ की स्थापना सुनिश्चित की जाएगी।

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