राष्ट्र साधना के 100 वर्ष पर गूंजी ओजस्वी काव्य धारा

0
37
A Resonant Stream of Spirited Poetry Echoes on the Centenary of National Dedication
A Resonant Stream of Spirited Poetry Echoes on the Centenary of National Dedication

जयपुर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, जयपुर विभाग की ओर से मानसरोवर में “राष्ट्र साधना के 100 वर्ष” विषय पर भव्य काव्य संध्या आयोजित हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ मां भारती व मां शारदे के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलन और बांसवाड़ा के कवि बृजमोहन तूफान की सरस्वती वंदना से हुआ।

संयोजक रवि पारीक ने बताया कि परिषद द्वारा जयपुर में पहली बार आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से आए कवियों ने राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुतियां दीं। मुख्य अतिथि सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा ने भारतीय काव्य परंपरा में राष्ट्रीयता और संस्कृति के महत्व को रेखांकित किया।
काव्य संध्या में डॉ. प्रवीण आर्य (दिल्ली), दास आरोही (उ.प्र.), डॉ. विनीत चौहान, मोनिका गौड़ (बीकानेर), गोरधन सिंह सोढा ‘जहरीला’ (बाड़मेर), नवनीत गौड़ (कोटपुतली), सुरेन्द्र सिंह राव (उदयपुर), कृष्णार्जुन पार्थभक्ति (चित्तौड़गढ़), राजेंद्र गौड़ (कोटा) और प्रवीण श्रीराम देशमुख (महाराष्ट्र) सहित कई कवियों ने प्रस्तुतियां दीं।

जयपुर के गीतकार विकास तिवारी ‘प्रज्ञेय’ ने “भारत ने भारत में फिर से जीना सीखा…” गीत और प्रचारक के त्याग-बलिदान पर आधारित रचनाएं प्रस्तुत कर विशेष सराहना प्राप्त की। नर्मदापुरम (मध्यप्रदेश) के सौरभ सूर्य ने शिवाजी व महाराणा प्रताप के संदर्भ में ओजपूर्ण काव्य पाठ किया।
स्वागताध्यक्ष पं. देवीशंकर शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रोता देर रात तक उपस्थित रहे। मंच संचालन डॉ. विनीत चौहान ने किया तथा अंत में सभी का आभार व्यक्त किया गया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here