रिफाइनरी से लेकर महिला आरक्षण तक गहलोत ने सरकार को घेरा

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From refinery to women's reservation, Gehlot surrounded the government
From refinery to women's reservation, Gehlot surrounded the government

जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उसकी कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मंगलवार को अपने निवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में गहलोत ने कहा कि उनकी सोशल मीडिया सीरीज ‘इंतज़ार शास्त्र’ के चलते सरकार बैकफुट पर आ गई है और केवल बयानबाजी तक सीमित रह गई है, जबकि धरातल पर विकास कार्यों की स्थिति स्पष्ट नहीं है।

रिफाइनरी अग्निकांड पर उठाए सवाल

पचपदरा रिफाइनरी में हाल ही में हुई आग की घटना पर चिंता जताते हुए गहलोत ने इसे गंभीर बताते हुए कहा कि नई रिफाइनरी में इस प्रकार की घटना या तो तकनीकी चूक का परिणाम है या जल्दबाजी में कार्य पूर्ण करने का दबाव रहा होगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने एक विदेशी विशेषज्ञ से भी चर्चा की है।

महिला आरक्षण पर सरकार को घेरा

महिला आरक्षण के मुद्दे पर गहलोत ने भाजपा की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्ष 2023 में विधेयक पारित होने के बावजूद लंबे समय तक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सर्वदलीय बैठक की मांग को नजरअंदाज कर सरकार ने भ्रम की स्थिति पैदा की है। साथ ही प्रदेश में महिला आयोग का पद खाली होना भी उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं पर प्रश्नचिह्न बताया।

किसान, ठेकेदार और योजनाओं पर चिंता

गहलोत ने कहा कि प्रदेश का किसान आर्थिक दबाव में है और कर्जमाफी की जरूरत है। मुख्यमंत्री के हालिया बयान को उन्होंने किसानों का अपमान बताया। पीएचईडी में लगभग 4500 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि ठेकेदार आंदोलन की राह पर हैं। इसके अलावा आरजीएचएस योजना की स्थिति पर भी चिंता जताते हुए कहा कि पेंशनरों और मेडिकल स्टोर्स के भुगतान लंबित हैं।

संवैधानिक संस्थाओं और भ्रष्टाचार पर आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री ने पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में देरी को असंवैधानिक बताया। आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव घोटाले का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार से जुड़े लोगों और आरोपियों के बीच संबंध हैं, जिससे गरीबों को न्याय मिलने में बाधा आ रही है।

गहलोत ने कहा कि प्रदेश सरकार को जनता से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से काम करना चाहिए, न कि केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहना चाहिए।

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