जल जीवन मिशन घोटाला: रिमांड में चल रहे संजय बड़ाया को कोर्ट ने भेजा जेल

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Jal Jeevan Mission Scam
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जयपुर। जल जीवन मिशन घोटाले की जांच कर रही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने बुधवार को पूर्व पीएचईडी मंत्री डॉ. महेश जोशी के करीबी माने जाने वाले संजय बड़ाया को अदालत में पेश किया। जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। संजय बड़ाया पर पीएचईडी अधिकारियों और ठेकेदारों से मिलीभगत कर टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी करवाने तथा ट्रांसफर-पोस्टिंग के नाम पर रिश्वतखोरी में शामिल होने के गंभीर आरोप है।

एसीबी महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने बताया कि संजय बड़ाया को 11 मई को दिल्ली एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उसे जयपुर लाकर गिरफ्तार किया गया। अदालत ने उसे तीन दिन के पुलिस रिमांड पर सौंपा था। रिमांड अवधि समाप्त होने पर बुधवार को उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से न्यायालय ने उसे जेल भेजने के आदेश दिए।

जांच में सामने आया है कि श्रीगणपति ट्यूबवेल कंपनी के प्रोपराइटर महेश मित्तल और श्रीश्याम ट्यूबवेल कंपनी के प्रोपराइटर पदमचंद जैन ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के फर्जी प्रमाण-पत्र तैयार कर जल जीवन मिशन के तहत करीब 960 करोड़ रुपए के टेंडर हासिल किए। एसीबी जांच में इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन मंत्री डॉ. महेश जोशी, विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल, कई मुख्य अभियंताओं, अतिरिक्त मुख्य अभियंताओं, ठेकेदारों और संजय बड़ाया की मिलीभगत सामने आई है।

एसीबी के अनुसार 50 करोड़ रुपए से अधिक राशि के टेंडरों में साइट विजिट प्रमाण-पत्र की शर्त जोड़ने में भी संजय बड़ाया की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जांच में पाया गया कि नियमों से हटकर यह शर्त जोड़ने से बोली लगाने वालों की पहचान उजागर हो जाती थी, जिससे टेंडर पुलिंग कर 30 से 40 प्रतिशत अधिक दरों पर निविदाएं स्वीकृत करवाई गईं।

बताया जा रहा है कि ऐसे टेंडरों की कुल राशि करीब 20 हजार करोड़ रुपए तक पहुंचती है। एसआईटी की पड़ताल में यह भी सामने आया कि संजय बड़ाया विभागीय कार्यों में सक्रिय दखल रखता था और आरोपी ठेकेदारों से उसके करीबी संबंध थे।

जांच एजेंसी को रिश्वत के लेन-देन से जुड़े तथ्य भी मिले हैं। इसके अलावा पीएचईडी अधिकारियों पर तबादले और विभागीय कार्रवाई का दबाव बनाकर ट्रांसफर-पोस्टिंग कराने तथा इसके बदले मोटी रकम लेने के आरोप भी सामने आए हैं।इएसीबी अब मामले में जुड़े अन्य आरोपियों, वित्तीय लेन-देन और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है।

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