कलश यात्रा के साथ गीता गायत्री मंदिर में रामकथा का शुभारंभ

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Ramkatha Commences at Gita Gayatri Temple with a Kalash Yatra
Ramkatha Commences at Gita Gayatri Temple with a Kalash Yatra

जयपुर। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर शहर स्थित गीता गायत्री मंदिर में रविवार को भव्य कलश एवं पोथी यात्रा के साथ मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की दिव्य कथा का शुभारंभ हुआ। कथा का आयोजन खोजीदराचार्य राम रिछपाल दास महाराज के आशीर्वाद तथा महंत अंजन कुमार गोस्वामी, गोपाल दास महाराज, अलबेली शरण महाराज एवं संत समाज अध्यक्ष सियाराम दास महाराज के सानिध्य में प्रारंभ हुआ।

कार्यक्रम संयोजक पंडित राजकुमार चतुर्वेदी ने बताया कि रामकथा से पूर्व निकाली गई भव्य पोथी-कलश यात्रा को नगर के प्रमुख संतों ने पूजा-अर्चना कर रवाना किया। यात्रा में संत समाज अध्यक्ष सियाराम दास , सुदर्शन आचार्य महाराज, कुमार , मानव लोकेश मिश्रा, पंडित मुकेश शर्मा, रामरज महाराज तथा योगाचार्य मनीष सूर्यवंशी सहित अनेक संत-महात्मा शामिल हुए।

मंदिर प्रवक्ता नीतीश चैतन्य चतुर्वेदी ने बताया कि 108 से अधिक महिलाओं ने एक जैसी पीली साड़ी धारण कर सिर पर कलश रखे और मंगल गीत गाते हुए तपती दोपहरी में प्रभु श्रीराम के जयकारों के साथ भव्य यात्रा निकाली। यात्रा का विभिन्न स्थानों पर पुष्प वर्षा एवं शीतल पेय पिलाकर स्वागत किया गया। मंदिर पहुंचने पर महाआरती के साथ दिव्य राम कथा का शुभारंभ हुआ।

व्यासपीठ से पातालपुरी पीठाधीश्वर बालक देवाचार्य जी महाराज ने रामकथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “राम से बड़ा राम का नाम है।” उन्होंने कहा कि रामकथा व्यक्ति को आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देती है तथा परिवार सहित कथा श्रवण करने से पारिवारिक दूरियां, भाई-भाई के विवाद एवं सामाजिक कुरीतियां समाप्त हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं और पुरुषोत्तम मास जप, तप एवं दान का संदेश देता है।

उन्होंने बताया कि प्रत्येक तीन वर्ष में आने वाला अधिक मास अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस मास में भगवान ने स्वयं अपना नाम “पुरुषोत्तम मास” के रूप में प्रदान किया है। अधिक मास सौर वर्ष एवं चंद्र वर्ष के सामंजस्य से निर्मित होता है। इस दौरान 33 प्रकार के दान का विशेष महत्व माना गया है तथा परंपरा अनुसार 33 मालपुओं का बायना घर-घर बहनों को देने की मान्यता भी प्रचलित है।

मंदिर में दिव्य रामकथा का आयोजन 23 मई तक किया जाएगा। इसके पश्चात शुक्ल पक्ष में राम कथा एवं कृष्ण पक्ष में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन 9 से 15 जून तक होगा।

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