विश्व हिन्दू परिषद की सामाजिक समरसता संगोष्ठी में एकता, सौहार्द और समानता का आह्वान

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Vishva Hindu Parishad's Social Harmony Seminar
Vishva Hindu Parishad's Social Harmony Seminar

जयपुर। विश्व हिन्दू परिषद जयपुर महानगर एवं जयपुर प्रांत सामाजिक समरसता अभियान के तत्वावधान में आदर्श विद्या मंदिर, बनीपार्क में “संगत और पंगत से समरसता” विषय पर सामाजिक समरसता संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज में एकता, भाईचारे, सौहार्द और समानता का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद मंचासीन अतिथियों का दुपट्टा पहनाकर स्वागत एवं सम्मान किया गया। संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में व्यवसायी राजेन्द्र मीणा मौजूद रहे, जबकि अध्यक्षता समाजसेवी एवं खण्डेलवाल समाज संस्था झोटवाड़ा के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद दुसाद ने की।

इस अवसर पर विश्व हिन्दू परिषद के अखिल भारतीय समरसता प्रमुख एवं केंद्रीय मंत्री देव भाई रावत, क्षेत्रीय समरसता प्रमुख रामसिंह, संत मोहननाथ महाराज तथा हाथोज धाम के बाल मुकुंदाचार्य महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए रामसिंह ने कहा कि समाज में समभाव और सद्भाव बनाए रखना वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। संत आशीर्वचन में बाल मुकुंदाचार्य महाराज एवं योगी मोहननाथ महाराज ने समाज को एकजुट होकर समरसता के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

मुख्य वक्ता देव भाई रावत ने कहा कि समरसता, करुणा और समभाव भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं। समस्त प्राणी जगत एक ही परम सत्ता की अभिव्यक्ति है, इसलिए सभी के प्रति समान भाव, सम्मान और सह-अस्तित्व रखना ही सच्चा धर्म है। उन्होंने समाज में आपसी भाईचारे और सामाजिक समरसता को और मजबूत बनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में अखिल भारतीय साहित्य प्रकाशन प्रमुख सेवा भारती मूलचंद, प्रांत सह संघचालक हेमंत सेठिया, जयपुर महानगर मंत्री विश्व हिन्दू परिषद राकेश शर्मा, प्रांत कार्यकारिणी सदस्य मोहन कुमावत, मोहन छीपा तथा पूर्व अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष जसवीर सिंह सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम संयोजक हर्ष कुमार प्रजापत ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया। संगोष्ठी का सबसे प्रेरक दृश्य तब देखने को मिला जब करीब 500 प्रबुद्धजन एक साथ पंगत में बैठकर प्रसादी ग्रहण करते नजर आए। यह दृश्य सामाजिक समरसता, समानता और भाईचारे की जीवंत मिसाल बन गया। वक्ताओं ने कहा कि समरस समाज ही सशक्त, संगठित और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राष्ट्र की मजबूत नींव होता है।

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