जयपुर। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी 25 मई को गंगा दशहरा पर्व इस साल दुर्लभ और शुभ संयोगों में मनाया जाएगा। इस बार गंगा दशहरा पर हस्त नक्षत्र, रवि योग, व्यातिपात योग, आनंद योग, गुरु-चंद्रमा की युति (गजकेसरी योग) सहित पांच विशेष शुभ योगों का महासंयोग बन रहा है। इसे अत्यंत फलदायी माना जा रहा है। इन शुभ संयोगों में गंगा स्नान, दान, जप-तप, तर्पण और पूजा-अर्चना का पुण्यफल कई गुना बढ़ जाएगा।
ज्योतिषाचार्य डॉ. महेन्द्र मिश्रा ने बताया कि इसी दिन मां गंगा का स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। गंगा दशहरा दस प्रकार के पापों के नाश का पर्व ब्रह्मपुराण के अनुसार इस दिन किए गए गंगा स्नान और दान से तीन कायिक, चार वाचिक और तीन मानसिक दोषों का शमन होता है। यही कारण है कि इस तिथि को दश-हरा कहा गया है। मान्यता है कि मां गंगा के पवित्र जल में ऐसे दिव्य गुण विद्यमान हैं, जो ग्रहों के दुष्प्रभाव को शांत करने के साथ मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करते हैं।
इस बार गंगा दशहरा सोमवार को पड़ रहा है, जो भगवान शिव का दिन माना जाता है। मां गंगा भगवान शिव की जटाओं से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। इसी कारण इस बार शिव और गंगा पूजा का विशेष संयोग बन रहा है। श्रद्धालु इस दिन भगवान शिव और मां गंगा की आराधना कर रोग, भय, संकट और जीवन की बाधाओं से मुक्ति की कामना करेंगे।
वैदिक पंचांग के अनुसार दशमी तिथि का प्रारंभ 25 मई को प्रात: लगभग 4:30 बजे से होगा और इसका समापन 26 मई को प्रात: लगभग 5:10 बजे तक रहेगा। ब्रह्म मुहूर्त स्नान, जप और दान के लिए सर्वश्रेष्ठ रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:09 बजे से 1:02 बजे तक रहेगा।
इसके अतिरिक्त सर्वार्थ थसिद्धि, आयुष्मान, शुभ और शोभन योग सुबह 5:23 बजे से सुबह 11:32 बजे तक प्रभावी रहेंगे। इसके बाद सौभाग्य योग दोपहर 12:43 बजे से प्रारंभ होगा तथा अमृत योग दोपहर 12:51 बजे से शुरू होकर शाम तक रहेगा। इन योगों में किए गए धार्मिक कार्य विशेष फलदायी माने गए हैं।



















