असंसदीय भाषा और अराजक राजनीति लोकतंत्र के लिए घातक : मदन राठौड़

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जयपुर। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने विपक्षी नेताओं की ओर से अपनाई जा रही असंसदीय भाषा और अराजक राजनीति पर चिंता जताते हुए कहा कि लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद और विरोध स्वाभाविक हैं, लेकिन विरोध और दुश्मनी के बीच की रेखा लांघना लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए घातक है। उन्होंने कहा कि भाजपा विचारों का विरोध करती है, व्यक्तियों का नहीं, और राजनीतिक संवाद में मर्यादा व शालीनता को सर्वोच्च महत्व देती है।

राठौड़ ने बिना नाम लिए नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ नेता राजनीतिक लाभ के लिए समाज में टकराव और आवेश का माहौल बना रहे हैं। उन्होंने कुचामन में अपने दौरे के दौरान समर्थकों द्वारा किए गए विरोध का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ लोग तख्तियां लेकर उनकी गाड़ी के पास पहुंचे और आक्रामक व्यवहार करने लगे, जिसके चलते सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें वाहन से उतरने नहीं दिया।

उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों का दायित्व युवाओं को सकारात्मक दिशा देना और कानून के प्रति सम्मान का भाव विकसित करना है। बिजली बिल नहीं भरने, सरकारी व्यवस्थाओं का विरोध करने और कानून व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा करने वाले बयान युवाओं को गलत दिशा में ले जाते हैं। लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है, लेकिन लोगों को कानून तोड़ने के लिए उकसाने का अधिकार किसी को नहीं है।

राठौड़ ने कहा कि संविधान की शपथ लेकर जनप्रतिनिधि बनने वालों को संवैधानिक संस्थाओं और कानून का सम्मान करना चाहिए। राजनीतिक जीवन में भाषा की गरिमा बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि नेताओं के शब्द समाज को प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा मजबूत विपक्ष, सरकार की आलोचना और जनहित के मुद्दों पर संघर्ष की पक्षधर है, लेकिन राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को व्यक्तिगत दुश्मनी में बदलना उचित नहीं है।

उन्होंने राजनीतिक दलों और नेताओं से मर्यादित भाषा और स्वस्थ संवाद की संस्कृति अपनाने का आह्वान किया तथा मीडिया से भी लोकतांत्रिक मूल्यों और सकारात्मक राजनीति को बढ़ावा देने की अपील की। भाजपा लोकतांत्रिक परंपराओं, राजनीतिक शुचिता और स्वस्थ संवाद के लिए प्रतिबद्ध है।

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