नकली खाद का बड़ा खेल उजागर: संदिग्ध उर्वरक और 750 कट्टे औद्योगिक नमक बरामद

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Suspicious Fertilizer and 750 Sacks of Industrial Salt Recovered
Suspicious Fertilizer and 750 Sacks of Industrial Salt Recovered

जयपुर। हरमाड़ा थाना क्षेत्र के सीकर रोड स्थित रामलियावाला इलाके में कृषि विभाग ने कार्रवाई करते हुए कथित नकली खाद निर्माण और अवैध भंडारण के एक संदिग्ध मामले का खुलासा किया है। विभागीय टीम ने एक गोदाम पर छापा मारकर भारी मात्रा में संदिग्ध उर्वरक, औद्योगिक नमक, दानेदार कच्चा पदार्थ, साबुन कण तथा अन्य सामग्री बरामद की है। मामले में गोदाम को सीज कर संचालकों के खिलाफ हरमाड़ा थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई गई है।

कृषि अधिकारी सावरमल यादव की ओर से दर्ज रिपोर्ट के अनुसार विभाग को लंबे समय से संदिग्ध तरीके से खाद तैयार करने और भंडारण की शिकायतें मिल रही थीं। इसी आधार पर 29 मई को रामलियावाला क्षेत्र स्थित एक गोदाम पर सर्च अभियान चलाया गया। मौके पर पहुंचने पर अधिकारियों ने पाया कि गोदाम के बाहर या अंदर किसी भी फर्म, कंपनी अथवा लाइसेंसधारी प्रतिष्ठान का बोर्ड नहीं लगा हुआ था।

जांच के दौरान गोदाम से तीन कट्टे संदिग्ध डीएपी, एक कट्टा संदिग्ध एमओपी, 750 कट्टे औद्योगिक नमक, 867 कट्टे काले-भूरे रंग का दानेदार कच्चा पदार्थ तथा 56 कट्टे साबुन कण बरामद किए गए। इसके अलावा पोटाश के 25 खाली कट्टे, रंग मिला हुआ नमक और रंगाई-पैकिंग में प्रयुक्त सामग्री भी मिली। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि इन सामग्रियों का उपयोग खाद जैसे उत्पाद तैयार कर बाजार में खपाने के लिए किया जा रहा था।

इस कार्रवाई के दौरान मौजूद नरेंद्र मीणा ने स्वयं को गोदाम का मुनीम बताया और मालिक के रूप में निखिल शर्मा का नाम बताया। अधिकारियों ने जब लाइसेंस, स्टॉक रजिस्टर और कारोबार से संबंधित दस्तावेज मांगे तो संतोषजनक जवाब नहीं मिला। निखिल शर्मा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उसका मोबाइल फोन बंद मिला।

जांच में यह भी सामने आया कि गोदाम में उपलब्ध दस्तावेजों में गोबर खाद के भंडारण का उल्लेख था, जबकि मौके पर मिली सामग्री दस्तावेजों से मेल नहीं खा रही थी। दस्तावेजों और वास्तविक भंडारण में अंतर मिलने पर कृषि विभाग ने संदिग्ध डीएपी और एमओपी के नमूने जांच के लिए भिजवा दिए।

कृषि विभाग ने पूरे गोदाम को सीज कर दिया है। हरमाड़ा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस और कृषि विभाग अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि यह कथित कारोबार कब से संचालित हो रहा था, सामग्री कहां सप्लाई की जा रही थी और इस नेटवर्क से कितने लोग जुड़े हुए हैं।

विभागीय अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जिलेभर में संदिग्ध उर्वरक कारोबार और अवैध भंडारण के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाएगा, ताकि किसानों तक पहुंचने वाले घटिया और संदिग्ध उत्पादों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

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