जयपुर। राज्यसभा चुनाव-2026 की अधिसूचना जारी होने के साथ ही राजस्थान की सियासत में हलचल तेज हो गई है। प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होना है। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, भाजपा सांसद राजेंद्र गहलोत और कांग्रेस सांसद नीरज डांगी का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है। मौजूदा विधानसभा गणित को देखते हुए दो सीटों पर भाजपा और एक सीट पर कांग्रेस की जीत लगभग तय मानी जा रही है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 8 जून निर्धारित की गई है, लेकिन दोनों दलों ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं।
विधानसभा का गणित तय करेगा तस्वीर
राजस्थान विधानसभा में भाजपा के 118 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 67 विधायक हैं। इसके अलावा भारतीय आदिवासी पार्टी (बीएपी) के 4, बहुजन समाज पार्टी के 2, राष्ट्रीय लोक दल का 1 विधायक और 8 निर्दलीय विधायक हैं। इसी अंकगणित के आधार पर भाजपा दो और कांग्रेस एक सीट जीतने की मजबूत स्थिति में है।
भाजपा में कई दिग्गजों के नाम चर्चा में
भाजपा के भीतर राज्यसभा के लिए संभावित उम्मीदवारों को लेकर व्यापक मंथन चल रहा है। शुरुआती स्तर पर तीसरी सीट के लिए भी रणनीति पर चर्चा हुई, लेकिन फिलहाल पार्टी दो सीटों पर ही फोकस करती नजर आ रही है।
दावेदारों में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। संगठन और चुनावी रणनीति में उनकी सक्रिय भूमिका को देखते हुए उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वहीं पूर्व प्रदेशाध्यक्ष एवं हरियाणा भाजपा प्रभारी सतीश पूनिया का नाम भी चर्चाओं में है। हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा की सफलता के बाद संगठन में उनका कद बढ़ा है। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि यदि उन्हें राज्यसभा भेजा जाता है तो केंद्र सरकार में जिम्मेदारी मिल सकती है।
महिला और सामाजिक समीकरणों पर भी नजर
भाजपा सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति पर भी काम कर रही है। पार्टी की राष्ट्रीय मंत्री अलका गुर्जर का नाम संभावित उम्मीदवारों में शामिल है। दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाने वाली अलका गुर्जर पहले भी राज्यसभा की चर्चाओं में रह चुकी हैं।
इसके अलावा गुर्जर समाज के प्रभावशाली नेता स्वर्गीय कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के परिवार को प्रतिनिधित्व देने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष विजय बैंसला और उनकी बहन सुनीता बैंसला के नाम भी राजनीतिक चर्चाओं में बने हुए हैं। माना जा रहा है कि भाजपा गुर्जर वोट बैंक को साधने के लिहाज से इस विकल्प पर गंभीरता से विचार कर सकती है।
कांग्रेस में सोशल इंजीनियरिंग की कवायद
कांग्रेस की ओर से भी उम्मीदवार चयन को लेकर मंथन जारी है। पार्टी नेतृत्व सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर उम्मीदवार तय करना चाहता है। ओबीसी वर्ग में पहले से ही गोविंद सिंह डोटासरा, अशोक गहलोत और सचिन पायलट जैसे बड़े चेहरे मौजूद हैं, जबकि अनुसूचित जाति वर्ग का प्रतिनिधित्व नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली कर रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस सामान्य वर्ग, अनुसूचित जनजाति या अल्पसंख्यक समुदाय से उम्मीदवार उतारने पर विचार कर रही है।
सीपी जोशी सबसे मजबूत दावेदारों में
कांग्रेस खेमे में सबसे चर्चित नाम विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सी.पी. जोशी का है। पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में शामिल जोशी को वैचारिक रूप से मजबूत चेहरा माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस उन्हें राज्यसभा भेजती है तो पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूत प्रतिनिधित्व मिलेगा। साथ ही वागड़-मेवाड़ क्षेत्र में राजनीतिक संदेश जाएगा। इसके अलावा राजस्थान राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रेहाना रियाज का नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल बताया जा रहा है। यदि कांग्रेस अल्पसंख्यक और महिला प्रतिनिधित्व के समीकरण पर दांव खेलती है तो उनकी दावेदारी मजबूत हो सकती है।
नामों पर सस्पेंस बरकरार
राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अभी अपने उम्मीदवारों के नामों को लेकर अंतिम फैसला सार्वजनिक नहीं किया है। आगामी दिनों में दिल्ली और जयपुर में बैठकों का दौर तेज होने की संभावना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सामाजिक संतुलन, संगठनात्मक योगदान और आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखकर दोनों दल उम्मीदवारों का चयन करेंगे। फिलहाल राजस्थान की तीन राज्यसभा सीटों को लेकर सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है और सभी की नजरें अब 8 जून से पहले होने वाले अंतिम नामों की घोषणा पर टिकी हैं।



















