भारतीय संस्कृति में ऊंच-नीच एवं भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं: अकिंचन महाराज

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जयपुर। सखी सहेली महिला मंडल की ओर से ब्रह्मपुरी रोड स्थित मंगोड़ी वालों की बगीची स्थित श्रीमोहन मंदिर प्रांगण में आयोजित श्री रामथा में गुरुवार को व्यासपीठ से अकिंचन महाराज ने केवट प्रसंग पर प्रवचन किए। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में ऊंच-नीच एवं भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं है।

व्यक्ति की महानता उसके जन्म, जाति या सामाजिक स्थिति से नहीं, बल्कि उसके हृदय में बसे भगवान श्रीराम के प्रति श्रद्धा और भक्ति से निर्धारित होती है। जिसके हृदय में राम का वास नहीं है, वह वास्तव में छोटा है, जबकि रामभक्ति से ओत-प्रोत व्यक्ति ही सच्चे अर्थों में महान कहलाने योग्य है।

उन्होंने कहा कि भक्ति, मुक्ति और मोक्ष से भी श्रेष्ठ है। जब किसी साधक को रामभक्ति प्राप्त हो जाती है, तब उसके ज्ञान और विद्या पर स्वयं ब्रह्म का प्रकाश विराजमान हो जाता है। हमारे वेद, पुराण, इतिहास और श्रुतियां कहीं भी भेदभाव का समर्थन नहीं करते, बल्कि समरसता, प्रेम और समानता का संदेश देती हैं।

भक्ति गंगा के समान पवित्र प्रवाह है, विद्या उस पर चलने वाली नाव है और विद्वान केवट के समान है, जो साधक को आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ाता है। कृष्ण स्वरूप बूब ने बताया कि शनिवार को सीताहरण, शबरी मिलन, सुग्रीव मिलन की कथा होगी। कथा 15 जून तक दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक होगी। कथा का आयोजन सखी सहेली महिला मंडल की ओर से किया जा रहा है।

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