न्यूरो सर्जन डॉ. वी.डी. सिन्हा बने एएएसएनएस के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष

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Neurosurgeon Dr. V.D. Sinha becomes International President of AASNS.
Neurosurgeon Dr. V.D. Sinha becomes International President of AASNS.

जयपुर। वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ. वी.डी. सिन्हा को ‘एशियन-ऑस्ट्रेलियन सोसाइटी ऑफ न्यूरोलॉजिकल सर्जन्स’ (एएएसएनएस) का अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष मनोनीत किया गया है। यह गौरव हासिल करने वाले डॉ. सिन्हा भारत के पहले न्यूरो सर्जन हैं, जो कि अंतराष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं जो कि महासचिव व न्यूरो ट्रोमा सोसाइटी के चैयरमैन भी रह चुके हैं। उनकी इस वैश्विक कामयाबी से देश और प्रदेश के चिकित्सा जगत में हर्ष की लहर है।

यह ऐतिहासिक निर्णय फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित एएएसएनएस की इंटरनेशनल मीटिंग के दौरान लिया गया। विश्व के इस सबसे बड़े कॉन्टिनेंटल न्यूरोसर्जिकल संगठन के द्विवार्षिक चुनाव में डॉ. सिन्हा की साख और योग्यता को देखते हुए उन्हें सर्वसम्मति (निर्विरोध) से अध्यक्ष चुना गया। अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से पहले डॉ. सिन्हा इस प्रतिष्ठित संस्था के महासचिव के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

डॉ. वी.डी. सिन्हा का न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत बड़ा योगदान रहा है। वे इससे पहले भी कई महत्वपूर्ण वैश्विक पदों को सुशोभित कर चुके हैं। वे ‘वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ न्यूरोलॉजिकल सोसाइटीज’ (डब्ल्यूएफएनएस) के सैकंड वाइस प्रेसिडेंट भी रह चुके हैं। ‘वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ न्यूरोलॉजिकल सोसाइटीज’ की ‘न्यूरोरिहैबिलिटेशन और पुनर्निर्माण न्यूरोसर्जरी कमेटी’ के डॉ. वीडी सिन्हा अध्यक्ष भी हैं।

डॉ. सिन्हा ने राजस्थान में न्यूरोसर्जरी की आधुनिक तकनीकों और इलाज को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। वे जयपुर के सवाई मान सिंह (एसएमएस) अस्पताल के न्यूरो सर्जरी विभाग में लंबे समय तक आचार्य (प्रोफेसर) के पद पर रहे और वहीं से सेवानिवृत्त हुए। वर्तमान में डॉ. सिन्हा जयपुर के प्रसिद्ध संतोकबा दुर्लभजी अस्पताल (एसडीएमएच) में न्यूरो सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष के रूप में मरीजों को अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि डॉ. सिन्हा का इस शीर्ष अंतरराष्ट्रीय पद पर पहुंचना भारत में न्यूरोसर्जरी के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है। इससे न केवल भारतीय डॉक्टरों का वैश्विक मंचों पर प्रतिनिधित्व बढ़ेगा, बल्कि न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में नए शोध और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।

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